Unit II 2. पारिस्थितिकी तंत्र का अर्थ व प्रकार

जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर

पर्यावरण भूगोल (Environmental Geography)

Topic: Ecosystem — Meaning, Types, Components & Functioning

पारिस्थितिकी तंत्र — अर्थ, प्रकार, घटक एवं कार्यप्रणाली


प्रस्तुतकर्ता: डॉ. नवीन कुमार पारीक

व्याख्याता, भूगोल



1. पारिस्थितिकी तंत्र का अर्थ

Meaning of Ecosystem

Ecosystem शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है—

Eco = पर्यावरण/आवास    System = तंत्र


अर्थात् पारिस्थितिकी तंत्र एक ऐसी प्राकृतिक क्रियात्मक इकाई है जिसमें किसी क्षेत्र के जीवित घटक (Biotic Components) और अजीवित घटक (Abiotic Components) एक-दूसरे के साथ निरंतर अंतःक्रिया करते हैं।

> “जीव समुदाय तथा उसके भौतिक पर्यावरण की पारस्परिक क्रियाओं से निर्मित क्रियात्मक इकाई को पारिस्थितिकी तंत्र कहते हैं।”


उदाहरण—

वन + मिट्टी + जल + वायु + सूर्य का प्रकाश + वनस्पति + जन्तु + सूक्ष्मजीव = वन पारिस्थितिकी तंत्र



2. पारिस्थितिकी तंत्र की संकल्पना

ए. जी. टेन्सले (A. G. Tansley) ने 1935 में Ecosystem शब्द एवं संकल्पना को प्रस्तुत किया।

टेन्सले के अनुसार, जीव समुदाय और उसके भौतिक पर्यावरण को अलग-अलग न देखकर उन्हें एक समग्र एवं क्रियात्मक इकाई के रूप में समझना चाहिए।


टेन्सले का योगदान

उन्होंने यह स्पष्ट किया कि—

जीव + भौतिक पर्यावरण + उनके बीच अंतःक्रिया = पारिस्थितिकी तंत्र

इसलिए Ecosystem केवल पेड़-पौधों और जन्तुओं का समूह नहीं है, बल्कि इसमें मिट्टी, जल, वायु, तापमान, प्रकाश आदि भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।


3. पारिस्थितिकी तंत्र की प्रमुख विशेषताएँ

पारिस्थितिकी तंत्र की मुख्य विशेषताएँ निम्न हैं—

1. यह एक क्रियात्मक इकाई है।

2. इसमें जैविक एवं अजैविक दोनों घटक होते हैं।

3. सभी घटकों के बीच निरंतर अंतःक्रिया होती है।

4. इसमें ऊर्जा का प्रवाह होता है।

5. इसमें पोषक तत्वों का चक्रण होता है।

6. खाद्य श्रृंखला एवं खाद्य जाल पाए जाते हैं।

7. उत्पादक, उपभोक्ता एवं अपघटक इसके प्रमुख जैविक घटक हैं।

8. पारिस्थितिकी तंत्र गतिशील होता है।

9. यह प्राकृतिक या कृत्रिम दोनों हो सकता है।

10. किसी भी आकार का हो सकता है—छोटे तालाब से लेकर पूरे जीवमंडल तक।



4. पारिस्थितिकी तंत्र के प्रकार

Types of Ecosystem

पारिस्थितिकी तंत्र को मुख्यतः निम्न आधारों पर वर्गीकृत किया जा सकता है।


A. प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र

Natural Ecosystem

जो पारिस्थितिकी तंत्र प्राकृतिक रूप से विकसित होते हैं और जिनका संचालन मुख्यतः प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा होता है, उन्हें प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र कहते हैं।

इन्हें दो प्रमुख भागों में बाँटा जाता है—

1. स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र

Terrestrial Ecosystem

भूमि पर पाए जाने वाले पारिस्थितिकी तंत्र।

प्रमुख उदाहरण

वन पारिस्थितिकी तंत्र

घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्र

मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र

पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र

टुंड्रा पारिस्थितिकी तंत्र


2. जलीय पारिस्थितिकी तंत्र

Aquatic Ecosystem

जल में पाए जाने वाले पारिस्थितिकी तंत्र।

इसके दो प्रमुख प्रकार हैं—

(i) मीठे जल का पारिस्थितिकी तंत्र

Freshwater Ecosystem

उदाहरण—

तालाब

झील

नदी

जलाशय


(ii) समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र

Marine Ecosystem

उदाहरण—

महासागर

समुद्र

प्रवाल भित्ति

मुहाना/Estuary



B. कृत्रिम पारिस्थितिकी तंत्र

Artificial Ecosystem

मानव द्वारा निर्मित अथवा मानव द्वारा अत्यधिक नियंत्रित पारिस्थितिकी तंत्र को कृत्रिम पारिस्थितिकी तंत्र कहते हैं।


उदाहरण

कृषि क्षेत्र

उद्यान

कृत्रिम तालाब

मछली पालन क्षेत्र

एक्वेरियम

इनमें प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र की तुलना में मानव का नियंत्रण अधिक होता है।




5. पारिस्थितिकी तंत्र के घटक

Components of Ecosystem

पारिस्थितिकी तंत्र के दो प्रमुख घटक होते हैं—

1. अजैविक घटक — Abiotic Components

2. जैविक घटक — Biotic Components



6. अजैविक घटक

Abiotic Components


जो घटक निर्जीव होते हैं, उन्हें अजैविक घटक कहते हैं।

इनको मुख्यतः तीन वर्गों में समझा जा सकता है—

(A) भौतिक घटक

सूर्य का प्रकाश

तापमान

वर्षा

आर्द्रता

वायु

जल

मृदा

स्थलाकृति



(B) रासायनिक घटक

ऑक्सीजन

कार्बन डाइऑक्साइड

नाइट्रोजन

फॉस्फोरस

कैल्शियम

पोटैशियम

जल एवं विभिन्न खनिज लवण



(C) जलवायु संबंधी घटक

तापमान

वर्षा

वायुदाब

पवन

आर्द्रता

सूर्य विकिरण


महत्व

अजैविक घटक यह निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं कि किसी क्षेत्र में किस प्रकार के जीव पाए जाएंगे।


उदाहरण के लिए—


कम वर्षा + उच्च तापमान → मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र


अधिक वर्षा + पर्याप्त तापमान → घना वन पारिस्थितिकी तंत्र



7. जैविक घटक

Biotic Components


पारिस्थितिकी तंत्र में पाए जाने वाले सभी जीवित घटकों को जैविक घटक कहते हैं।

इन्हें मुख्यतः तीन वर्गों में विभाजित किया जाता है—

1. उत्पादक — Producers

2. उपभोक्ता — Consumers

3. अपघटक — Decomposers



-

8. उत्पादक

Producers

जो जीव सूर्य के प्रकाश की सहायता से प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, उन्हें उत्पादक कहते हैं।


उदाहरण


हरे पौधे


घास


शैवाल


फाइटोप्लवक



भूमिका


उत्पादक पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा का प्रवेश कराने वाला प्रमुख जैविक घटक हैं।


सूर्य की ऊर्जा → उत्पादक → जैविक ऊर्जा



---


9. उपभोक्ता


Consumers


जो जीव अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते और भोजन के लिए अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं, उन्हें उपभोक्ता कहते हैं।


प्रमुख प्रकार


प्रथम श्रेणी के उपभोक्ता


ये शाकाहारी होते हैं और सीधे उत्पादकों को खाते हैं।


उदाहरण: गाय, हिरण, खरगोश, बकरी।


द्वितीय श्रेणी के उपभोक्ता


ये प्राथमिक उपभोक्ताओं को खाते हैं।


उदाहरण: मेंढक, छिपकली आदि।


तृतीय श्रेणी के उपभोक्ता


ये अन्य मांसाहारी जीवों का भी शिकार कर सकते हैं।


उदाहरण: साँप, बाज आदि।


शीर्ष उपभोक्ता


खाद्य श्रृंखला के ऊपरी स्तर पर पाए जाने वाले प्रमुख शिकारी।


उदाहरण: बाघ, शेर आदि।



---


10. अपघटक


Decomposers


वे जीव जो मृत पौधों एवं जन्तुओं के जैविक पदार्थों को सरल पदार्थों में विघटित करते हैं, अपघटक कहलाते हैं।


प्रमुख उदाहरण


जीवाणु


कवक



महत्व


अपघटक—


मृत जैव पदार्थ → सरल पदार्थ → पोषक तत्व → मिट्टी → पौधे


इस प्रकार पोषक तत्वों को पुनः पर्यावरण में उपलब्ध कराते हैं।


इसी कारण इन्हें पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्चक्रणकर्ता (Recyclers) भी कहा जाता है।



---


11. पारिस्थितिकी तंत्र की संरचना

इसे निम्न प्रकार समझा जा सकता है—

पारिस्थितिकी तंत्र

                       │

          ┌────────────┴────────────┐

          │ │

      अजैविक घटक जैविक घटक

      Abiotic Biotic

          │ │

  ┌───────┼───────┐ ┌────────┼────────┐

  │ │ │ │ │ │

प्रकाश जल मृदा उत्पादक उपभोक्ता अपघटक

तापमान वायु खनिज Plants Animals Bacteria/

                                           Fungi



---


12. पारिस्थितिकी तंत्र की कार्यप्रणाली


Functioning of Ecosystem


पारिस्थितिकी तंत्र की कार्यप्रणाली को मुख्यतः निम्न प्रक्रियाओं द्वारा समझा जाता है—


1. ऊर्जा का प्रवाह



2. खाद्य श्रृंखला



3. खाद्य जाल



4. पोषी स्तर



5. अपघटन



6. पोषक तत्वों का चक्रण



7. पारिस्थितिक पिरामिड



8. आत्म-नियमन एवं संतुलन





---


13. ऊर्जा का प्रवाह


Energy Flow


पारिस्थितिकी तंत्र के लिए ऊर्जा का प्रमुख स्रोत सूर्य है।


ऊर्जा का प्रवाह सामान्यतः एकदिशीय होता है—


सूर्य → उत्पादक → प्राथमिक उपभोक्ता → द्वितीयक उपभोक्ता → तृतीयक उपभोक्ता


हर पोषी स्तर पर ऊर्जा का कुछ भाग जीवन-क्रियाओं में खर्च हो जाता है और ऊष्मा के रूप में बाहर निकल जाता है।


10% नियम


लिंडेमैन (Lindeman) के अनुसार सामान्यतः एक पोषी स्तर से अगले पोषी स्तर तक लगभग 10% ऊर्जा स्थानांतरित होती है।


उदाहरण—


पौधे — 10,000 इकाई

↓

शाकाहारी — 1,000 इकाई

↓

प्राथमिक मांसाहारी — 100 इकाई

↓

द्वितीयक मांसाहारी — 10 इकाई


इस कारण खाद्य श्रृंखला सामान्यतः बहुत लंबी नहीं होती।



---


14. खाद्य श्रृंखला


Food Chain


एक जीव से दूसरे जीव में भोजन एवं ऊर्जा के स्थानांतरण की क्रमिक प्रक्रिया को खाद्य श्रृंखला कहते हैं।


उदाहरण


घास → टिड्डा → मेंढक → साँप → बाज


यहाँ—


घास = उत्पादक


टिड्डा = प्राथमिक उपभोक्ता


मेंढक = द्वितीयक उपभोक्ता


साँप = तृतीयक उपभोक्ता


बाज = उच्च उपभोक्ता




---


15. खाद्य श्रृंखला के प्रमुख प्रकार


1. चराई खाद्य श्रृंखला


Grazing Food Chain


इसकी शुरुआत हरे पौधों से होती है।


घास → हिरण → बाघ


2. अपघटी खाद्य श्रृंखला


Detritus Food Chain


इसकी शुरुआत मृत जैव पदार्थों से होती है।


मृत पत्तियाँ → अपघटक → सूक्ष्मजीव/अन्य उपभोक्ता



---


16. खाद्य जाल


Food Web


जब अनेक खाद्य श्रृंखलाएँ आपस में जुड़ जाती हैं, तो खाद्य जाल बनता है।


प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र में खाद्य जाल खाद्य संबंधों की वास्तविक जटिलता को अधिक अच्छी तरह दर्शाता है।


महत्व


यदि किसी एक जीव की संख्या कम हो जाए तो कई जीव वैकल्पिक खाद्य स्रोतों का उपयोग कर सकते हैं। इसलिए खाद्य जाल पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता में योगदान देता है।



---


17. पोषी स्तर


Trophic Levels


खाद्य श्रृंखला में प्रत्येक पोषण स्तर को पोषी स्तर कहते हैं।


पोषी स्तर घटक


प्रथम उत्पादक

द्वितीय प्राथमिक उपभोक्ता

तृतीय द्वितीयक उपभोक्ता

चतुर्थ तृतीयक/उच्च उपभोक्ता



उत्पादक → शाकाहारी → मांसाहारी → उच्च मांसाहारी



---


18. अपघटन


Decomposition


मृत पौधों एवं जन्तुओं के जैविक पदार्थों के सूक्ष्मजीवों द्वारा सरल पदार्थों में टूटने की प्रक्रिया को अपघटन कहते हैं।


अपघटन की प्रमुख अवस्थाएँ


1. खंडन (Fragmentation)



2. लीचिंग (Leaching)



3. अपघटन/विघटन (Decomposition/Catabolism)



4. ह्यूमीकरण (Humification)



5. खनिजीकरण (Mineralisation)




महत्व


अपघटन से—


पोषक तत्व मुक्त होते हैं।


मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है।


मृत जैव पदार्थों का संचय नियंत्रित होता है।


पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण होता है।




---


19. पोषक तत्वों का चक्रण


Nutrient Cycling


पारिस्थितिकी तंत्र में पदार्थ नष्ट नहीं होते, बल्कि विभिन्न रूपों में एक घटक से दूसरे घटक में स्थानांतरित होते रहते हैं।


प्रमुख जैव-भूरासायनिक चक्र


जल चक्र


कार्बन चक्र


नाइट्रोजन चक्र


ऑक्सीजन चक्र


फॉस्फोरस चक्र



उदाहरण


मिट्टी → पौधे → शाकाहारी → मांसाहारी → मृत जैव पदार्थ → अपघटक → मिट्टी



---


20. पारिस्थितिक पिरामिड


Ecological Pyramid


पारिस्थितिकी तंत्र में विभिन्न पोषी स्तरों की संख्या, जैवभार अथवा ऊर्जा को पिरामिड के रूप में प्रदर्शित किया जा सकता है।


इसके तीन प्रमुख प्रकार हैं—


1. संख्या का पिरामिड


Pyramid of Numbers


2. जैवभार का पिरामिड


Pyramid of Biomass


3. ऊर्जा का पिरामिड


Pyramid of Energy


ऊर्जा का पिरामिड हमेशा सीधा (Upright) होता है, क्योंकि प्रत्येक पोषी स्तर पर ऊर्जा में कमी होती जाती है।



---


21. पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन


पारिस्थितिकी तंत्र में विभिन्न घटकों के बीच संतुलित संबंध पाया जाता है।


उदाहरण—


पौधे → शाकाहारी → मांसाहारी → अपघटक


यदि किसी एक घटक में अत्यधिक परिवर्तन हो जाए, तो पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव पड़ सकता है।


मानवीय गतिविधियाँ जैसे—


वनों की कटाई


प्रदूषण


अत्यधिक चराई


शहरीकरण


औद्योगीकरण


जल का अति-दोहन



पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं।



---


22. पारिस्थितिकी तंत्र की प्रमुख कार्यप्रणालियाँ — एक नजर में


सूर्य की ऊर्जा

↓

उत्पादक

↓

प्राथमिक उपभोक्ता

↓

द्वितीयक उपभोक्ता

↓

तृतीयक उपभोक्ता

↓

मृत जैव पदार्थ

↓

अपघटक

↓

पोषक तत्व मिट्टी में वापस

↓

पौधों द्वारा पुनः उपयोग


इस प्रकार ऊर्जा का प्रवाह एकदिशीय है, जबकि पोषक तत्वों का चक्रण होता रहता है।



---


23. पारिस्थितिकी तंत्र का महत्व


परिस्थितिकी तंत्र मानव जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।


यह हमें प्रदान करता है—


1. भोजन


अनाज, फल, सब्जियाँ, मछली, पशु उत्पाद आदि।


2. ऑक्सीजन


वनस्पतियाँ प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से ऑक्सीजन उपलब्ध कराने में योगदान देती हैं।


3. जल


जल चक्र एवं जल संसाधनों के संरक्षण में पारिस्थितिकी तंत्र की भूमिका है।


4. मृदा संरक्षण


वनस्पति मृदा अपरदन को कम करती है।


5. जलवायु नियंत्रण


वन एवं महासागर कार्बन चक्र और जलवायु प्रणाली को प्रभावित करते हैं।


6. जैव विविधता संरक्षण


विभिन्न जीवों को आवास प्रदान करता है।


7. प्राकृतिक संसाधन


लकड़ी, औषधीय पौधे, खनिज आदि के उपयोग से संबंधित पारिस्थितिक आधार प्रदान करता है।



---


24. परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अंतर


जैविक एवं अजैविक घटकों में अंतर


आधार जैविक घटक अजैविक घटक


प्रकृति जीवित निर्जीव

उदाहरण पौधे, जन्तु, जीवाणु जल, वायु, मृदा, तापमान

भूमिका उत्पादन, उपभोग, अपघटन जीवन एवं जैविक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करना

ऊर्जा ऊर्जा का उपयोग/स्थानांतरण ऊर्जा एवं पदार्थ के पर्यावरणीय आधार



25. परीक्षा में लिखने योग्य परिभाषा

> “पारिस्थितिकी तंत्र एक ऐसी प्राकृतिक अथवा कृत्रिम क्रियात्मक इकाई है जिसमें किसी निश्चित क्षेत्र के जैविक घटक—उत्पादक, उपभोक्ता एवं अपघटक—और अजैविक घटक—जल, वायु, मृदा, प्रकाश, तापमान एवं खनिज—परस्पर अंतःक्रिया करते हुए ऊर्जा प्रवाह तथा पोषक तत्वों के चक्रण को संचालित करते हैं।”




⭐ परीक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रश्न

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. पारिस्थितिकी तंत्र की परिभाषा देते हुए इसके प्रमुख घटकों का विस्तार से वर्णन कीजिए।

2. पारिस्थितिकी तंत्र के विभिन्न प्रकारों को उदाहरण सहित समझाइए।

3. पारिस्थितिकी तंत्र की कार्यप्रणाली का वर्णन कीजिए।

4. पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा के प्रवाह को समझाइए।

5. खाद्य श्रृंखला एवं खाद्य जाल को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

6. उत्पादक, उपभोक्ता एवं अपघटक की पारिस्थितिकी तंत्र में भूमिका समझाइए।

7. पारिस्थितिकी तंत्र में पोषक तत्वों के चक्रण का महत्व स्पष्ट कीजिए।


लघु उत्तरीय प्रश्न

Ecosystem शब्द किसने दिया?

पारिस्थितिकी तंत्र क्या है?

जैविक घटक क्या हैं?

अजैविक घटक क्या हैं?

उत्पादक किसे कहते हैं?

उपभोक्ता के प्रकार लिखिए।

अपघटक क्या हैं?

खाद्य श्रृंखला क्या है?

खाद्य जाल क्या है?

पोषी स्तर क्या है?

10% नियम क्या है?

पारिस्थितिक पिरामिड क्या है?

अपघटन क्या है?

प्राकृतिक एवं कृत्रिम पारिस्थितिकी तंत्र में अंतर बताइए।




📝 परीक्षा के लिए 10 सबसे महत्वपूर्ण बिंदु

1. A.G. Tansley ने 1935 में Ecosystem की संकल्पना दी।



2. Ecosystem = Biotic + Abiotic components + Interaction.



3. जैविक घटक—उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक।



4. अजैविक घटक—प्रकाश, तापमान, जल, वायु, मृदा एवं खनिज।



5. उत्पादक पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा के प्रवेश का प्रमुख माध्यम हैं।



6. ऊर्जा का प्रवाह एकदिशीय होता है।



7. पोषक तत्वों का चक्रण होता रहता है।



8. खाद्य श्रृंखलाएँ मिलकर खाद्य जाल बनाती हैं।

9. अपघटक मृत जैव पदार्थों को विघटित कर पोषक तत्वों को पुनः उपलब्ध कराते हैं।



10. पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता ऊर्जा प्रवाह, पोषक चक्रण और जैविक-अजैविक अंतःक्रियाओं पर निर्भर करती है।












पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) का अर्थ है –

एक ऐसा प्राकृतिक तंत्र जहाँ जीवित (जैसे- पौधे, जानवर, मनुष्य, सूक्ष्मजीव) और अजैविक (जैसे- मिट्टी, पानी, हवा, सूर्य का प्रकाश) घटक एक-दूसरे के साथ परस्पर क्रिया करते हैं और एक संतुलित प्रणाली का निर्माण करते हैं।


🔹 परिभाषा:


"पारिस्थितिकी तंत्र वह कार्यात्मक इकाई है जिसमें जीव और उनके भौतिक परिवेश के बीच पारस्परिक क्रियाएँ होती हैं।"


🔹 उदाहरण:


जंगल (Forest Ecosystem)


तालाब (Pond Ecosystem)


मरुस्थल (Desert Ecosystem)


समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र (Marine Ecosystem)




Ecosystem means –


A natural system where living (e.g. plants, animals, humans, microorganisms) and abiotic (e.g. soil, water, air, sunlight) components interact with each other and form a balanced system.


🔹 Definition:


"Ecosystem is the functional unit in which interactions occur between organisms and their physical surroundings."


🔹 Example:


Forest Ecosystem


Pond Ecosystem


Desert Ecosystem


Marine Ecosystem



पारिस्थितिकी तंत्र की परिभाषा व प्रकार


---


🌿 पारिस्थितिकी तंत्र की परिभाषा:


"पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) एक ऐसी कार्यात्मक इकाई है जहाँ जैविक घटक (पौधे, जानवर, मनुष्य आदि) और अजैविक घटक (जल, मिट्टी, वायु, तापमान आदि) एक-दूसरे के साथ अंतःक्रिया करते हैं और ऊर्जा तथा पोषक तत्त्वों का आदान-प्रदान करते हैं।"


➡️ यह जीवों और उनके पर्यावरण के बीच परस्पर निर्भरता और संतुलन को दर्शाता है।



---


🧩 पारिस्थितिकी तंत्र के प्रकार:


पारिस्थितिकी तंत्र को मुख्यतः दो भागों में विभाजित किया गया है:


1. प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र (Natural Ecosystem):


ये प्रकृति में स्वयं बनते हैं और मानव हस्तक्षेप के बिना कार्य करते हैं।


🔸 स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र (Terrestrial Ecosystem):


जंगल (Forest)


घास के मैदान (Grassland)


मरुस्थल (Desert)


पर्वतीय क्षेत्र (Mountain)



🔸 जलीय पारिस्थितिकी तंत्र (Aquatic Ecosystem):


मीठे पानी के (Freshwater) – झील, तालाब, नदी


खारे पानी के (Marine) – समुद्र, महासागर



2. कृत्रिम पारिस्थितिकी तंत्र (Artificial Ecosystem):


ये मनुष्य द्वारा बनाए गए हैं और मानव नियंत्रण में रहते हैं।


🔸 खेत (Agricultural Field)

🔸 बगीचे (Gardens)

🔸 मछली पालन केंद्र (Fish tanks)

🔸 जैव मंडल आरक्षित क्षेत्र (Biosphere Reserves – वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए)



🌿 Definition of Ecosystem:


"Ecosystem is a functional unit where biotic components (plants, animals, humans etc.) and abiotic components (water, soil, air, temperature etc.) interact with each other and exchange energy and nutrients."


➡️ It shows the interdependence and balance between organisms and their environment.


🧩 Types of Ecosystem:


Ecosystem is mainly divided into two parts:


1. Natural Ecosystem:


These are formed in nature itself and function without human intervention.


 🔸 Terrestrial Ecosystem:


Forest


Grassland


Desert


Mountain


🔸 Aquatic Ecosystem:


Freshwater – lake, pond, river


Marine – sea, ocean


2. Artificial Ecosystem:


These are created by humans and are under human control.


🔸 Agricultural Field


🔸 Gardens


🔸 Fish tanks


🔸 Biosphere Reserves – for scientific research








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