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National and International Efforts on Environmental Management

National and International Efforts on Environmental Management  (पर्यावरण प्रबंधन पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रयास) पर्यावरण प्रबंधन पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रयास (National and International Efforts on Environmental Management) 1. पर्यावरण प्रबंधन का अर्थ पर्यावरण प्रबंधन (Environmental Management) का अर्थ है— प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग, प्रदूषण नियंत्रण, पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखना, तथा सतत विकास (Sustainable Development) सुनिश्चित करने हेतु नीतियाँ, योजनाएँ, कानून और कार्यक्रम तैयार करना व लागू करना। भाग–1 : पर्यावरण प्रबंधन के राष्ट्रीय प्रयास (National Efforts) भारत में पर्यावरण संरक्षण हेतु कई संवैधानिक प्रावधान, कानून, कार्यक्रम, संस्थाएँ और नीतियाँ प्रभावी रूप से कार्यरत हैं। A. संवैधानिक प्रावधान (Constitutional Provisions) भारतीय संविधान में पर्यावरण से जुड़े महत्वपूर्ण अनुच्छेद: 1. अनुच्छेद 48-A (Directive Principles) राज्य का दायित्व: पर्यावरण, वन्यजीव, वनों का संरक्षण व सुधार। 2. अनुच्छेद 51-A(g) (Fundamental Duty) प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य: व...

Con. of Natural Res. Mineral and Energy Resources

Conservation of Natural Resources: Mineral and Energy Resources  प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण (Conservation of Natural Resources) खनिज एवं ऊर्जा संसाधनों का संरक्षण (Mineral & Energy Conservation) खनिज संसाधनों का संरक्षण (Conservation of Mineral Resources) 1. खनिज का अर्थ पृथ्वी की परतों में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले अकार्बनिक, ठोस, निश्चित रासायनिक संरचना व भौतिक गुणों वाले पदार्थ खनिज कहलाते हैं। जैसे—लौह अयस्क, बॉक्साइट, तांबा, अभ्रक, मैंगनीज, कोयला, पेट्रोलियम आदि। 2. खनिजों का महत्व उद्योगों की रीढ़ निर्माण कार्य, परिवहन, ऊर्जा उत्पादन कृषि उपकरण, मशीनरी, रक्षा सामग्री रोजगार व आर्थिक विकास का आधार 3. खनिज क्षरण/समस्या 1. अत्यधिक दोहन – सीमित भंडार तेजी से समाप्त 2. अव्यवस्थित/गैर-वैज्ञानिक खनन 3. खनन से भूमि क्षरण, मृदा प्रदूषण, जल प्रदूषण 4. पुनर्चक्रण व उपयोग की कमी 5. खनन क्षेत्रों में जैव विविधता हानि 6. घटती ग्रेड (Low grade ores) 7. खनिज निर्यात में वृद्धि 4. खनिज संसाधनों का संरक्षण (A) वैज्ञानिक एवं तकनीकी उपाय 1. गैर-वैज्ञानिक खनन को रोकना 2. कुशल खनन तकनी...

Con. of Natural Res. Forest

Conservation of Natural Resources: Forest (वन संरक्षण)  वन संरक्षण (Conservation of Forest Resources) पर्यावरणीय भूगोल – प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण 1. वन का अर्थ एवं महत्व (A) वन का अर्थ पृथ्वी की जमीन का वह भाग जहाँ प्राकृतिक रूप से या मानव द्वारा लगाया गया वृक्ष–समूह घनी मात्रा में पाया जाता है, उसे वन कहते हैं। यह पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण घटक है। 2. वनों का महत्व (Importance of Forests) (A) पर्यावरणीय महत्व जलवायु नियंत्रण – CO₂ अवशोषण, तापमान नियंत्रण कार्बन सिंक – ग्रीनहाउस गैसों को कम कर जलवायु परिवर्तन को घटाते हैं मृदा संरक्षण – जड़ें मिट्टी को बांधती हैं जल चक्र का नियमन – वर्षा को प्रभावित करते हैं जैव विविधता का संरक्षण – वन्यजीवों का निवास स्थान बाढ़ नियंत्रण – रनऑफ कम करते हैं (B) आर्थिक महत्व लकड़ी, ईंधन, चारा औषधीय पौधे फल–फूल, गोंद, राल, तेल उद्योग—फर्नीचर, पेपर, फार्मास्यूटिकल वन पर्यटन से राजस्व (C) सामाजिक व सांस्कृतिक महत्व जनजातियों की आजीविका धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार 3. वनों का क्षरण (Degradation of Forests) (A) वनों के ...

Conservation of Water Resources

जल संसाधनों का संरक्षण (Conservation of Water Resources)  1. प्रस्तावना (Introduction) जल जीवन का मूल आधार है। विश्व में उपलब्ध जल का केवल 2.5% मीठा जल है, जिसमें से उपयोग योग्य जल लगभग 0.3% ही है। भारत जैसे विकासशील देश में कृषि, उद्योग, घरेलू उपयोग की बढ़ती मांग तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के कारण जल संसाधन अत्यधिक दबाव में हैं। इसीलिए जल संरक्षण पर्यावरण भौगोलिक अध्ययन का मुख्य विषय है। 2. जल संसाधनों की स्थिति (Status of Water Resources) वैश्विक स्तर पर मीठे जल की कमी बढ़ रही है। ग्लेशियर पिघल रहे हैं, जिससे भविष्य में जल संकट हो सकता है। कई क्षेत्रों में भूजल अत्यधिक स्तर तक दोहन का शिकार है। भारत में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता 1951 में 5000 घन मीटर से घटकर आज 1500 घन मीटर से भी कम। कई राज्यों में जल तनाव (Water Stress)। राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र के कई क्षेत्र जल संकट से प्रभावित। 3. जल क्षरण/समस्याएँ (Water Problems) (A) प्राकृतिक कारण 1. अनियमित मानसून 2. सूखा एवं बाढ़ 3. जलवायु परिवर्तन 4. नदी प्रवाह में बदलाव (B) मानवजनित कारण 1. अत्यधिक भूजल दोहन 2. वनों की कटाई 3. ...

Soil Conservation Conservation of Natural Resources

मृदा संरक्षण (Soil Conservation)  1. प्रस्तावना (Introduction) मृदा पृथ्वी की सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन (Natural Resource) है। कृषि उत्पादन, वनस्पति, जल चक्र, मानव बसावट—सभी का आधार मृदा ही है। लेकिन आधुनिक विकास, अत्यधिक कृषि, अंधाधुंध वृक्ष कटाई, खनन, निर्माण कार्य एवं जलवायु परिवर्तन के कारण मृदा का क्षरण तेज़ी से बढ़ रहा है। इसीलिए मृदा संरक्षण पर्यावरण प्रबंधन का प्रमुख घटक है। 2. मृदा क्षरण ( Soil Degradation ) मृदा के उपजाऊपन या भौतिक-संरचना में होने वाली गिरावट को मृदा क्षरण कहते हैं। मुख्य कारण 1. कटाव (Erosion) जल द्वारा कटाव पवन द्वारा कटाव हिमनद कटाव 2. अत्यधिक खेती (Over Cultivation) 3. भूमि पर अत्यधिक चराई (Overgrazing) 4. वनों की कटाई ( Deforestation ) 5. खनन एवं उद्योगों का विस्तार 6. मृदा प्रदूषण 7. प्राकृतिक आपदाएँ – बाढ़, सूखा, चक्रवात 3. मृदा संरक्षण की आवश्यकता (Need for Soil Conservation) 1. कृषि उत्पादन को बनाए रखना 2. जैव विविधता एवं पारिस्थितिकी की सुरक्षा 3. जल संसाधनों का संतुलन 4. भूमि का सतत उपयोग (Sustainable Land Use) 5. मरुस्थलीकरण (Desertific...

Ecological Basis of Environmental Management

पर्यावरण प्रबंधन का पारिस्थितिकीय आधार (Ecological Basis of Environmental Management) परिभाषा पर्यावरण प्रबंधन का अर्थ है— प्राकृतिक संसाधनों, पर्यावरणीय घटकों और मानव क्रियाकलापों के बीच संतुलन स्थापित करना ताकि सतत विकास संभव हो सके। इस प्रबंधन की वैज्ञानिक नींव पारिस्थितिकी (Ecology) प्रदान करती है, क्योंकि पारिस्थितिकी जीवों और उनके पर्यावरण के बीच संबंधों का अध्ययन करती है। 1. पारिस्थितिकीय आधार की आवश्यकता पर्यावरण प्रबंधन तभी प्रभावी हो सकता है जब हम पारिस्थितिक तत्त्वों को समझकर कार्य करें। इसकी आवश्यकता इसलिए है: (i) पारिस्थितिकी तंत्र की संरचना व कार्यप्रणाली को समझना जीवों में अंतःक्रिया,खाद्य श्रृंखला, जाल, पिरामिड ऊर्जा प्रवाह की सीमाएँ पोषक तत्व चक्र (ii) मानव हस्तक्षेप के प्रभाव का मूल्यांकन औद्योगिकीकरण, कृषि, खनन जनसंख्या वृद्धि प्रदूषण (iii) संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित करना जल, वन, मिट्टी, जैव संसाधन संरक्षण, पुनर्वास और उचित उपयोग 2. पर्यावरण प्रबंधन के मूल पारिस्थितिक सिद्धांत पर्यावरण प्रबंधन को समझने के लिए कुछ प्रमुख पारिस्थितिक सिद्धांत अत्यंत महत्त्वपूर्ण ह...

NET National Environmental Programs and Policies

राष्ट्रीय पर्यावरण कार्यक्रम और नीतियाँ (National Environmental Programs and Policies) राष्ट्रीय पर्यावरण नीतियाँ और कार्यक्रम (भारत)  परिचय और महत्व भारत में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक समेकित नीति और कानूनी ढांचा है, जिसे पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) संचालित करता है।  ये राष्ट्रीय नीतियाँ और कार्यक्रम यह सुनिश्चित करते हैं कि विकास और आर्थिक वृद्धि पर्यावरणीय दृष्टिकोण से संतुलित हो -अर्थात सतत विकास (sustainable development) का मार्ग पकड़ा जाए. प्रमुख राष्ट्रीय पर्यावरण नीतियाँ (Policies) यहाँ कुछ मुख्य पर्यावरण-नीतियाँ दी जा रही हैं: 1. राष्ट्रीय पर्यावरण नीति, 2006 (National Environment Policy, NEP 2006) यह नीति पर्यावरण प्रबंधन के लिए एक व्यापक फ्रेमवर्क देती है।  इसके उद्देश्य: महत्वपूर्ण पारिस्थितिक प्रणालियों और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, संसाधन-दक्ष उपयोग, पर्यावरण-शासन की मजबूती, और आर्थिक नियोजन में पर्यावरणीय मुद्दों का समावेश।  नीति यह भी मानती है कि पर्यावरण संरक्षण सिर्फ सरकार का उत्तरदायित्व नहीं है, बल्कि न...

NET Ecosystem & Human Ecology

Ecosystem (पारिस्थितिकी तंत्र)  1. पारिस्थितिकी तंत्र की परिभाषा पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) जीवित (Biotic) तथा अजैविक (Abiotic) अवयवों का गतिशील एवं परस्पर निर्भर तंत्र है, जिसमें ऊर्जा प्रवाह व पोषक चक्रण निरंतर चलता रहता है। टेंसली (Tansley, 1935) ने “Ecosystem” शब्द दिया। 2. पारिस्थितिकी तंत्र के मुख्य घटक A. जैविक (Biotic Components) 1. उत्पादक (Producers) – हरे पौधे, शैवाल; प्रकाश संश्लेषण द्वारा खाद्य ऊर्जा का निर्माण। 2. उपभोक्ता (Consumers) प्राथमिक—शाकाहारी द्वितीयक—मांसाहारी तृतीयक—शीर्ष शिकारी 3. अपघटक (Decomposers) – जीवाणु, फफूंद; मृत पदार्थ को सरल रूप में बदलते हैं। B. अजैविक अवयव (Abiotic Components) सूर्य प्रकाश, ताप, जल, वायुदाब, खनिज, मिट्टी, pH आदि। 3. ऊर्जा प्रवाह (Energy Flow) पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा का प्रवाह एकमार्गीय होता है। मुख्य सिद्धांत: लिंडेमैन का 10% नियम – प्रत्येक स्तर पर केवल 10% ऊर्जा अगले स्तर को प्राप्त होती है। ऊर्जा पिरामिड सदैव सीधा (upright) होता है। 4. पोषक चक्रण (Nutrient Cycles) 1. कार्बन चक्र (Carbon Cycle) 2. नाइट्रोजन चक्र (Ni...

NET Ecosystem: Geographic Classification

  पारिस्थितिकी तंत्र  का भौगोलिक वर्गीकरण  (Ecosystem: Geographic Classification) परितंत्र का भौगोलिक वर्गीकरण  परितंत्र (Ecosystem) एक ऐसी प्राकृतिक इकाई है जिसमें जीवित (Biotic) तथा अजीव (Abiotic) अवयव एक-दूसरे के साथ परस्पर क्रिया करते हैं। परितंत्रों का वर्गीकरण कई आधारों पर किया जाता है, परंतु भौगोलिक आधार (Geographical Basis) का वर्गीकरण सबसे व्यापक माना जाता है। भौगोलिक वर्गीकरण पृथ्वी की जलवायु, तापमान, वर्षा, मिट्टी, स्थलाकृति, ऊँचाई, अक्षांश आदि के आधार पर किया जाता है। 1. भौगोलिक वर्गीकरण के मुख्य आधार (Basis of Geographic Classification) 1. अक्षांश (Latitude) 2. ऊँचाई (Altitude) 3. वर्षा की मात्रा और वितरण (Rainfall & Pattern) 4. तापमान का वितरण (Temperature) 5. जलवायु क्षेत्र (Climatic Regions) 6. स्थलरूप एवं भू-आकृति (Landforms) 7. मृदा प्रकार (Soil Types) 8. वनस्पति क्षेत्र (Vegetation Zones) इन्हीं आधारों पर वैश्विक स्तर पर विभिन्न प्रकार के परितंत्र विकसित हुए हैं जिन्हें बायोम (Biome) भी कहा जाता है। 2. परितंत्रों का प्रमुख भौगोलिक वर्गीकरण (Maj...

Energy Crisis ऊर्जा संकट

ऊर्जा संकट  (Energy Crisis) परिभाषा : ऊर्जा संकट वह स्थिति है जब किसी देश या विश्व में ऊर्जा की उपलब्धता (Supply) और ऊर्जा की मांग (Demand) के बीच गंभीर असंतुलन उत्पन्न हो जाता है। अर्थात ऊर्जा की मांग बढ़ती जाती है, परंतु उपलब्ध संसाधन उस मांग को पूरा नहीं कर पाते। यह स्थिति आर्थिक, सामाजिक, औद्योगिक तथा पर्यावरणीय समस्याओं को जन्म देती है। ऊर्जा का महत्व उद्योगों के संचालन में  परिवहन व्यवस्था में  कृषि क्षेत्र में सिंचाई, मशीनरी व उर्वरक उत्पादन में  घरेलू उपयोग (रसोई गैस, बिजली, हीटिंग) सूचना–प्रौद्योगिकी व संचार में  राष्ट्रीय विकास और आर्थिक प्रगति का आधार  ऊर्जा बिना विकास की कल्पना असंभव है।   ऊर्जा संसाधनों के प्रमुख प्रकार (A) पारंपरिक ऊर्जा स्रोत 1. कोयला 2. पेट्रोलियम (कच्चा तेल) 3. प्राकृतिक गैस 4. परमाणु ऊर्जा 5. बायोमास (B) गैर-पारंपरिक/नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत 1. सौर ऊर्जा 2. पवन ऊर्जा 3. जलविद्युत 4. भूतापीय (Geothermal) 5. जैव-गैस 6. ज्वारीय एवं तरंगीय ऊर्जा ऊर्जा संकट के कारण (Causes of Energy Crisis) 1. जनसंख्या वृद्धि तेजी से बढ़ती जन...