Con. of Natural Res. Forest
Conservation of Natural Resources: Forest (वन संरक्षण)
वन संरक्षण (Conservation of Forest Resources)
पर्यावरणीय भूगोल – प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण
1. वन का अर्थ एवं महत्व
(A) वन का अर्थ
पृथ्वी की जमीन का वह भाग जहाँ प्राकृतिक रूप से या मानव द्वारा लगाया गया वृक्ष–समूह घनी मात्रा में पाया जाता है, उसे वन कहते हैं। यह पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण घटक है।
2. वनों का महत्व (Importance of Forests)
(A) पर्यावरणीय महत्व
जलवायु नियंत्रण – CO₂ अवशोषण, तापमान नियंत्रण
कार्बन सिंक – ग्रीनहाउस गैसों को कम कर जलवायु परिवर्तन को घटाते हैं
मृदा संरक्षण – जड़ें मिट्टी को बांधती हैं
जल चक्र का नियमन – वर्षा को प्रभावित करते हैं
जैव विविधता का संरक्षण – वन्यजीवों का निवास स्थान
बाढ़ नियंत्रण – रनऑफ कम करते हैं
(B) आर्थिक महत्व
लकड़ी, ईंधन, चारा
औषधीय पौधे
फल–फूल, गोंद, राल, तेल
उद्योग—फर्नीचर, पेपर, फार्मास्यूटिकल
वन पर्यटन से राजस्व
(C) सामाजिक व सांस्कृतिक महत्व
जनजातियों की आजीविका
धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व
ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार
3. वनों का क्षरण (Degradation of Forests)
(A) वनों के क्षरण के प्रमुख कारण
1. अत्यधिक कटाई एवं अवैध दोहन
2. कृषि विस्तार व झूम खेती (Shifting Cultivation)
3. खनन व औद्योगिक परियोजनाएँ
4. सड़कों, बांधों, रेल परियोजनाओं का निर्माण
5. अतिचारण (Overgrazing)
6. वनाग्नि (Forest Fire) – प्राकृतिक व मानवीय
7. जनसंख्या वृद्धि व शहरीकरण
8. ईंधन लकड़ी की बढ़ती मांग
9. जलवायु परिवर्तन
10. कीट एवं रोग प्रकोप
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4. भारत में वनों की स्थिति
भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 21–24% भाग वनाच्छादित है (अच्छे वनों सहित)।
भारतीय वन नीति 1988 का लक्ष्य – देश के 33% क्षेत्र में वनावरण।
उत्तर-पूर्व, उत्तराखंड, हिमालयी क्षेत्र व पश्चिमी घाट जैव विविधता के हॉटस्पॉट हैं।
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5. वन संरक्षण के उपाय (Methods of Forest Conservation)
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(A) कानूनी एवं नीतिगत उपाय
1. भारतीय वन नीति (Forest Policy)
1952 – अधिकतम उत्पादन और आर्थिक लाभ पर जोर।
1988 – संरक्षण, पारिस्थितिक संतुलन, जन भागीदारी पर आधारित।
2. वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 (FCA–1980)
बिना अनुमति वन भूमि का गैर-वन उपयोग प्रतिबंधित।
खनन/औद्योगिक परियोजनाओं के लिए केंद्रीय अनुमति अनिवार्य।
3. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972
वन्यजीवों व जैव विविधता की रक्षा।
4. CAMPA (Compensatory Afforestation Fund)
वन भूमि उपयोग के बदले अन्यत्र पुनर्वनीकरण हेतु फंड।
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(B) जैविक एवं तकनीकी उपाय
1. पुनर्वनीकरण (Reforestation)
कटे हुए स्थानों पर फिर से पौधे लगाना।
2. वनीकरण (Afforestation)
जहाँ पहले कभी वन नहीं थे वहाँ वन स्थापित करना।
3. मिश्रित वृक्षारोपण
स्थानीय, देशज प्रजातियों का उपयोग—जैव विविधता बढ़ती है।
4. एग्रोफॉरेस्ट्री (Agro-Forestry)
कृषि भूमि पर पेड़–फसल का संयोजन।
5. सोशल फॉरेस्ट्री
गाँवों, सड़कों, नहर किनारों पर पौधरोपण – सामुदायिक वन।
6. सस्टेनेबल फॉरेस्ट मैनेजमेंट (SFM)
GIS, Remote Sensing से वनों की निगरानी, वैज्ञानिक कटाई।
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(C) सामाजिक एवं सामुदायिक उपाय
1. संयुक्त वन प्रबंधन (JFM)
वन विभाग + स्थानीय समुदाय
संरक्षण, निगरानी, संसाधन साझा करने का मॉडल।
2. चिपको आंदोलन
उत्तराखंड में ग्रामीणों का पर्यावरणीय आंदोलन
पेड़ों से चिपककर कटाई रोकने का प्रयास
दुनिया को सामुदायिक संरक्षण मॉडल दिया।
3. वन पंचायतें
हिमालयी क्षेत्र में स्थानीय लोगों द्वारा वन प्रबंधन।
4. जनजागरण कार्यक्रम
वन दिवस, पौधारोपण अभियान
NGOs, SHGs, विद्यार्थी भागीदारी
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(D) वैज्ञानिक एवं आधुनिक उपाय
ड्रोन वन निगरानी
सीड बॉल्स – हवा या हाथ से फैलाकर पुनर्जीवन
कार्बन ट्रेडिंग व REDD+
जलवायु आधारित वन प्रबंधन
वनाग्नि नियंत्रण उपकरण—अर्ली वार्निंग सिस्टम
6. वन संरक्षण के लाभ
पारिस्थितिक लाभ
मिट्टी क्षरण कम
जल संसाधनों का संरक्षण
तापमान व वर्षा में स्थिरता
वन्यजीव सुरक्षा
आर्थिक लाभ
वन-आधारित उद्योग
रोजगार
पर्यटन
सामाजिक लाभ
आदिवासियों की आजीविका
ग्रामीण विकास
स्वास्थ्य, औषधीय संसाधन
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7. भारत के प्रमुख कार्यक्रम / योजनाएँ
वन महोत्सव
ग्रीन इंडिया मिशन
राष्ट्रीय वन नीति
अमृत वन योजना
राष्ट्रीय जैव विविधता मिशन
स्मार्ट फॉरेस्ट पहल
नेशनल अफॉरेस्टेशन प्रोग्राम (NAP)
8. परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण बिंदु (Quick Revision Points)
FCA–1980 वन भूमि संरक्षण की प्रमुख रीढ़ है।
वन नीति 1988 : Conservation + Community Participation।
चिपको आंदोलन विश्व का सर्वश्रेष्ठ सामुदायिक वन संरक्षण मॉडल।
वनाग्नि, अतिचारण, शहरीकरण व जलवायु परिवर्तन मुख्य खतरे।
SFM, सोशल फॉरेस्ट्री और JFM आधुनिक संरक्षण उपाय हैं।
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