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Carbon Cycle

 कार्बन चक्र (Carbon Cycle) की व्याख्या कार्बन चक्र वह प्राकृतिक जैव-भू-रासायनिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा कार्बन तत्व वायुमंडल, जीवमंडल, स्थलमंडल और जलमंडल के बीच निरंतर संचरण करता रहता है। यह पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व के लिए अत्यंत आवश्यक है। 1. वायुमंडल में कार्बन वायुमंडल में कार्बन मुख्यतः कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) गैस के रूप में पाया जाता है। यह श्वसन, ज्वालामुखी विस्फोट, जीवाश्म ईंधन के दहन आदि से वायुमंडल में पहुँचता है। 2. प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की सहायता से वायुमंडल की CO₂ को ग्रहण कर भोजन (ग्लूकोज़) बनाते हैं। इस प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं। इससे कार्बन पौधों के शरीर में संचित हो जाता है। 3. खाद्य श्रृंखला के माध्यम से संचरण जब शाकाहारी जीव पौधों को खाते हैं और मांसाहारी जीव शाकाहारियों को खाते हैं, तो कार्बन एक जीव से दूसरे जीव में स्थानांतरित होता है। इस प्रकार कार्बन खाद्य श्रृंखला के माध्यम से प्रवाहित होता है। 4. श्वसन (Respiration) सभी जीव (पौधे और जानवर) श्वसन के दौरान CO₂ को पुनः वायुमंडल में छोड़ते हैं। इस प्रकार कार्ब...

Food Chain

  खाद्य श्रृंखला (Food Chain) खाद्य श्रृंखला वह क्रम है जिसके द्वारा एक जीव दूसरे जीव को खाकर ऊर्जा प्राप्त करता है। अर्थात् ऊर्जा और पोषक तत्वों का एक जीव से दूसरे जीव में स्थानांतरण ही खाद्य श्रृंखला कहलाता है। 1️⃣ खाद्य श्रृंखला की परिभाषा खाद्य श्रृंखला पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) में जीवों के बीच भोजन और ऊर्जा के प्रवाह का क्रमबद्ध मार्ग है। उदाहरण – घास → हिरण → शेर यहाँ घास उत्पादक है, हिरण प्राथमिक उपभोक्ता और शेर द्वितीयक/तृतीयक उपभोक्ता। 2️⃣ खाद्य श्रृंखला के घटक (1) उत्पादक (Producers) हरे पौधे, शैवाल सूर्य की ऊर्जा से भोजन बनाते हैं। (2) उपभोक्ता (Consumers) प्राथमिक उपभोक्ता – शाकाहारी (जैसे गाय, हिरण) द्वितीयक उपभोक्ता – मांसाहारी (जैसे मेंढक, लोमड़ी) तृतीयक उपभोक्ता – शीर्ष शिकारी (जैसे शेर, बाज) (3) अपघटक (Decomposers) जीवाणु, कवक मृत जीवों को विघटित कर पोषक तत्व मिट्टी में मिलाते हैं। 3️⃣ खाद्य श्रृंखला के प्रकार 1. चराई खाद्य श्रृंखला (Grazing Food Chain) यह हरे पौधों से शुरू होती है। उदाहरण – घास → टिड्डा → मेंढक → साँप → बाज 2. अपघटित खाद्य श्रृंखला (Detritus...

Energy Flow

पर्यावरण भूगोल : ऊर्जा प्रवाह (Energy Flow) ऊर्जा प्रवाह से आशय पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) में ऊर्जा के एक स्तर से दूसरे स्तर तक संचरण की प्रक्रिया से है। यह प्रवाह मुख्यतः सूर्य से प्रारम्भ होकर उत्पादकों, उपभोक्ताओं और अपघटकों तक पहुँचता है। 1️⃣ ऊर्जा का स्रोत पृथ्वी पर ऊर्जा का मुख्य स्रोत सूर्य है। सौर ऊर्जा को हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की प्रक्रिया द्वारा रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं। 2️⃣ ऊर्जा प्रवाह की प्रक्रिया ऊर्जा का प्रवाह निम्नलिखित स्तरों से होकर गुजरता है— उत्पादक (Producers) हरे पौधे, शैवाल आदि सूर्य की ऊर्जा को भोजन में बदलते हैं। प्राथमिक उपभोक्ता (Primary Consumers) शाकाहारी जीव जैसे हिरण, गाय आदि उत्पादकों को खाकर ऊर्जा प्राप्त करते हैं। द्वितीयक एवं तृतीयक उपभोक्ता (Secondary & Tertiary Consumers) मांसाहारी एवं सर्वाहारी जीव अन्य उपभोक्ताओं को खाकर ऊर्जा प्राप्त करते हैं। अपघटक (Decomposers) जीवाणु, कवक मृत जीवों को विघटित कर ऊर्जा एवं पोषक तत्व पुनः पर्यावरण में लौटाते हैं। 3️⃣ ऊर्जा प्रवाह की विशेषताएँ 🔹 ऊर्जा का प्रवाह एकदिशीय (...

VI EG II Subsistence Agriculture

कृषि : आत्मनिर्वाह कृषि  (Subsistence Agriculture) 1. आत्मनिर्वाह कृषि का अर्थ आत्मनिर्वाह कृषि वह कृषि प्रणाली है जिसमें किसान मुख्यतः अपने और अपने परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए फसल उत्पादन करता है। इसमें उत्पादन का उद्देश्य व्यावसायिक लाभ नहीं, बल्कि जीविका निर्वाह होता है। सरल शब्दों में –  “जिस कृषि में उत्पादन उपभोग के लिए होता है, बाजार के लिए नहीं, उसे आत्मनिर्वाह कृषि कहते हैं।” 2. आत्मनिर्वाह कृषि की प्रमुख विशेषताएँ छोटे जोत आकार – भूमि का आकार बहुत छोटा होता है। परंपरागत कृषि विधियाँ – हल, बैल, हाथ के औजारों का प्रयोग। कम पूँजी निवेश – आधुनिक मशीनों, उर्वरकों का सीमित उपयोग। मानव श्रम पर निर्भरता – परिवार के सदस्य ही मुख्य श्रमिक होते हैं। कम उत्पादन – उत्पादन केवल घरेलू आवश्यकता तक सीमित। प्राकृतिक कारकों पर निर्भरता – वर्षा, मिट्टी और जलवायु का गहरा प्रभाव। फसल विविधता – एक ही खेत में कई फसलें उगाई जाती हैं। 3. आत्मनिर्वाह कृषि के प्रकार (क) आदिम आत्मनिर्वाह कृषि (Primitive Subsistence Agriculture) यह सबसे प्राचीन कृषि प्रणाली है। इसमें स्थानांतरण कृषि (Sh...

VI EG II Agriculture meaning and Types

कृषि (Agriculture) 1. कृषि का अर्थ कृषि मानव की प्राथमिक आर्थिक क्रिया है, जिसमें भूमि, जल, श्रम और पूँजी की सहायता से फसलों का उत्पादन, पशुपालन और संबंधित गतिविधियाँ की जाती हैं। परिभाषा “भूमि पर पौधों एवं पशुओं के नियोजित उत्पादन की प्रक्रिया को कृषि कहते हैं।” 2. कृषि का उद्भव और विकास कृषि का प्रारंभ नवपाषाण काल में हुआ। मानव ने शिकार और संग्रहण से हटकर स्थायी जीवन अपनाया। प्रमुख कृषि विकास क्षेत्र— सिंधु घाटी नील नदी घाटी टिगरिस–यूफ्रेटिस घाटी ह्वांग हो घाटी 3. कृषि के प्रमुख घटक भूमि – कृषि का मूल आधार मिट्टी – उत्पादन क्षमता का निर्धारक जलवायु – तापमान, वर्षा, आर्द्रता श्रम – मानव एवं पशु श्रम पूँजी – बीज, खाद, मशीनें तकनीक – आधुनिक विधियाँ, यंत्रीकरण 4. कृषि के प्रकार (Types of Agriculture) (क) आत्मनिर्वाह कृषि (Subsistence Agriculture) उत्पादन घरेलू उपभोग हेतु छोटे खेत, परंपरागत विधियाँ भारत, चीन, अफ्रीका में प्रचलित (ख) वाणिज्यिक कृषि (Commercial Agriculture) बाजार के लिए उत्पादन बड़े खेत, आधुनिक तकनीक अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया (ग) मिश्रित कृषि (Mixed Farming) फसल + पशुपालन...

VI EG I Conservation of Resources

संसाधनों का संरक्षण (Conservation of Resources) 1. संसाधन का अर्थ वे सभी प्राकृतिक, मानवीय एवं मानव-निर्मित तत्व जो मानव की आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं और आर्थिक विकास में सहायक होते हैं, संसाधन कहलाते हैं। जैसे— भूमि, जल, वन, खनिज, ऊर्जा, मानव शक्ति आदि। 2. संसाधनों के संरक्षण का अर्थ संसाधनों का संरक्षण वह प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत संसाधनों का समुचित, विवेकपूर्ण, योजनाबद्ध और दीर्घकालीन उपयोग किया जाता है ताकि वे वर्तमान के साथ-साथ भावी पीढ़ियों के लिए भी उपलब्ध रहें। 3. संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता सीमित संसाधन – अधिकांश प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं। जनसंख्या वृद्धि – बढ़ती जनसंख्या से संसाधनों पर दबाव। अत्यधिक दोहन – औद्योगीकरण और शहरीकरण से संसाधनों का क्षय। पर्यावरण संरक्षण – संसाधन क्षय से प्रदूषण व जलवायु परिवर्तन। सतत विकास – भविष्य की पीढ़ियों के अधिकार सुरक्षित रखना। 4. संसाधनों के संरक्षण के उद्देश्य संसाधनों का दीर्घकालीन उपयोग पर्यावरण संतुलन बनाए रखना आर्थिक विकास को स्थायी बनाना संसाधनों का न्यायसंगत वितरण भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं की पूर्ति 5. संसाधनों के संरक्षण...

II HG II Influence of Climate and Water Bodies

जलवायु और जल निकायों का मानव गतिविधियों पर प्रभाव (Influence of Climate and Water Bodies on Human Activities) भूमिका मानव और प्राकृतिक पर्यावरण के बीच घनिष्ठ संबंध है। जलवायु तथा जल निकाय मानव जीवन, उसकी आर्थिक गतिविधियों, रहन-सहन, भोजन, वस्त्र, आवास एवं व्यवसायों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं। इसी कारण मानव भूगोल में इनका विशेष महत्व है। 1. जलवायु का मानव गतिविधियों पर प्रभाव जलवायु के प्रमुख तत्व—तापमान, वर्षा, आर्द्रता, पवन तथा ऋतु परिवर्तन—मानव गतिविधियों को गहराई से प्रभावित करते हैं। (A) कृषि पर प्रभाव वर्षा फसलों के चयन को निर्धारित करती है। अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में धान, जूट कम वर्षा वाले क्षेत्रों में बाजरा, ज्वार तापमान फसलों की वृद्धि अवधि को प्रभावित करता है। मानसूनी जलवायु भारत की कृषि की आधारशिला है। (B) मानव निवास पर प्रभाव समशीतोष्ण जलवायु वाले क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व अधिक होता है। अत्यधिक ठंडे (टुंड्रा) और गर्म (मरुस्थलीय) क्षेत्रों में जनसंख्या विरल होती है। (C) आवास एवं वस्त्र पर प्रभाव ठंडे क्षेत्रों में लकड़ी एवं मोटी दीवारों वाले घर...

VI EG I Animal resources

पशु संसाधन : अर्थ आर्थिक भूगोल में पशु संसाधन से तात्पर्य उन पालतू एवं उपयोगी पशुओं से है जिनसे मनुष्य को आर्थिक, सामाजिक एवं पोषण संबंधी लाभ प्राप्त होते हैं। इनमें गाय, भैंस, भेड़, बकरी, ऊँट, घोड़ा, सूअर, मुर्गी, मछली आदि शामिल हैं। पशु संसाधनों का आर्थिक महत्व पशु संसाधन मानव जीवन और अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं— खाद्य आपूर्ति दूध, दही, घी, मांस, अंडा आदि कृषि में सहयोग हल चलाना, परिवहन, गोबर खाद कच्चा माल ऊन, चमड़ा, हड्डियाँ, सींग रोजगार का साधन पशुपालन, डेयरी, पोल्ट्री, चमड़ा उद्योग ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार भूमिहीन किसानों के लिए आय का मुख्य स्रोत पशु संसाधनों के प्रकार 1. दुधारू पशु गाय, भैंस, ऊँट, याक भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश 2. कार्यकारी पशु बैल, घोड़ा, ऊँट, खच्चर कृषि व परिवहन में उपयोग 3. ऊन उत्पादक पशु भेड़, बकरी, अल्पाका शीतोष्ण एवं शुष्क प्रदेशों में प्रमुख 4. मांस एवं अंडा उत्पादक पशु मुर्गी, सूअर, बकरी, भेड़ पोल्ट्री उद्योग का तीव्र विकास विश्व में पशु संसाधनों का वितरण भारत, चीन – पशुधन संख्या में अग्रणी ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड – भेड़ पालन अर्...

II HG II Natural influences on human activities.

“मानव क्रियाकलापों पर प्रमुख स्थलरूपों, जलवायु एवं जल निकायों का प्रभाव” मानव क्रियाकलापों पर प्राकृतिक कारकों का प्रभाव मानव भूगोल में यह माना जाता है कि मानव और प्राकृतिक पर्यावरण के बीच घनिष्ठ संबंध होता है। स्थलरूप, जलवायु तथा जल निकाय मानव की आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं बसाव संबंधी गतिविधियों को गहराई से प्रभावित करते हैं। 1. प्रमुख स्थलरूपों का मानव क्रियाकलापों पर प्रभाव (क) पर्वतीय स्थलरूप विशेषताएँ: ऊँचाई, ढाल, ठंडी जलवायु, कम उपजाऊ भूमि प्रभाव: कृषि: सीढ़ीनुमा (Terrace farming) कृषि आवास: विरल जनसंख्या, छोटे गाँव आजीविका: पशुपालन, वानिकी, पर्यटन परिवहन: कठिन एवं महँगा उद्योग: जलविद्युत उद्योग का विकास उदाहरण: हिमालय, आल्प्स, एंडीज (ख) पठारी स्थलरूप विशेषताएँ: समतल ऊँचाई, खनिज संपदा प्रभाव: खनन कार्य का विकास उद्योग: लौह-इस्पात, सीमेंट उद्योग कृषि: सीमित, वर्षा पर निर्भर जनसंख्या: मध्यम घनत्व उदाहरण: दक्कन का पठार, छोटा नागपुर पठार (ग) मैदानी स्थलरूप विशेषताएँ: समतल भूमि, उपजाऊ मिट्टी प्रभाव: घनी जनसंख्या का विकास कृषि: गेहूँ, चावल, गन्ना नगर एवं उद्योग: बड़े शहरों का विका...

VI EG 1 Fishing Worldwide distribution.

1. मत्स्य पालन व्यवसाय का अर्थ मत्स्य पालन वह आर्थिक क्रिया है, जिसके अंतर्गत समुद्रों, महासागरों, नदियों, झीलों, तालाबों एवं कृत्रिम जलाशयों से मछलियों तथा अन्य जलीय जीवों का पकड़ना, पालन-पोषण, संरक्षण एवं विपणन किया जाता है। आर्थिक भूगोल में, मत्स्य पालन को प्राथमिक व्यवसाय माना जाता है क्योंकि यह सीधे प्रकृति से संसाधन प्राप्त करता है। परिभाषा “जलाशयों से मछलियों एवं अन्य जलीय जीवों के शिकार एवं उत्पादन की प्रक्रिया को मत्स्य पालन कहते हैं।” 2. मत्स्य पालन के प्रकार / उत्पादन क्षेत्र (A) समुद्री मत्स्य पालन (Marine Fishing) यह महासागरों व समुद्रों में किया जाता है। मुख्य क्षेत्र महाद्वीपीय तट (Continental Shelf) उथले समुद्री भाग विशेषताएँ उत्पादन अधिक आधुनिक जहाज व ट्रॉलर का प्रयोग अंतरराष्ट्रीय व्यापार में महत्वपूर्ण (B) अंतर्देशीय मत्स्य पालन (Inland Fishing) नदियों, झीलों, तालाबों, बाँधों व नहरों में किया जाता है। मुख्य स्रोत नदियाँ – गंगा, यांग्त्से, नाइल झीलें – कैस्पियन, ग्रेट लेक्स कृत्रिम तालाब व जलाशय विशेषताएँ स्थानीय स्तर पर रोजगार पोषण का सस्ता स्रोत (C) मत्स्य पालन कृषि...

II HG II Geographic Environment and Man

“भौगोलिक पर्यावरण और मानव (Geographic Environment and Man)” 1. भौगोलिक पर्यावरण का अर्थ भौगोलिक पर्यावरण से तात्पर्य उस प्राकृतिक परिवेश से है जिसमें मानव जीवन का विकास होता है। इसमें पृथ्वी के सभी प्राकृतिक तत्त्व शामिल होते हैं जो मानव के जीवन, क्रियाकलापों और संस्कृति को प्रभावित करते हैं। परिभाषा “भौगोलिक पर्यावरण वह समस्त प्राकृतिक दशाएँ हैं जिनके अंतर्गत मानव जीवन संचालित होता है।” 2. भौगोलिक पर्यावरण के घटक (A) स्थलमंडल (Lithosphere) पर्वत, पठार, मैदान, घाटियाँ कृषि, खनन, परिवहन और बसावट को प्रभावित करता है (B) जलमंडल (Hydrosphere) महासागर, नदियाँ, झीलें, भूमिगत जल सिंचाई, पेयजल, उद्योग, मत्स्य पालन का आधार (C) वायुमंडल (Atmosphere) तापमान, वर्षा, पवन, आर्द्रता कृषि चक्र, मानव स्वास्थ्य, आवास शैली को प्रभावित करता है (D) जैवमंडल (Biosphere) वनस्पति, जीव-जंतु, मानव भोजन श्रृंखला और पारिस्थितिक संतुलन से जुड़ा 3. मानव और भौगोलिक पर्यावरण का संबंध मानव और पर्यावरण के बीच संबंध द्विपक्षीय (Reciprocal) है। पर्यावरण मानव को प्रभावित करता है मानव भी पर्यावरण में परिवर्तन करता है 4. मान...

II HG l Neo-Determinism नव निश्चयवाद

नव-निर्धारणवाद (Neo-Determinism) 1. नव-निर्धारणवाद का अर्थ नव-निर्धारणवाद मानव भूगोल की एक आधुनिक विचारधारा है, जिसके अनुसार प्राकृतिक पर्यावरण मनुष्य को पूर्णतः नियंत्रित नहीं करता, बल्कि मनुष्य को कुछ सीमाओं (limits) के भीतर कार्य करने की स्वतंत्रता देता है। इसे सामान्य शब्दों में “Stop and Go Determinism” भी कहा जाता है। 2. नव-निर्धारणवाद की उत्पत्ति नव-निर्धारणवाद का विकास पर्यावरण निर्धारणवाद और संभाव्यवाद के बीच संतुलन स्थापित करने हेतु हुआ। यह सिद्धांत यह स्वीकार करता है कि— प्रकृति पूर्ण स्वामी नहीं है और न ही मनुष्य पूर्ण स्वतंत्र 3. नव-निर्धारणवाद के प्रवर्तक ➡️ ग्रिफ़िथ टेलर (Griffith Taylor) इन्होंने ही Stop and Go Determinism की अवधारणा प्रस्तुत की। टेलर के अनुसार प्रकृति मनुष्य को 👉 कहाँ रुकना है (Stop) 👉 और कहाँ आगे बढ़ना है (Go) यह संकेत देती है। 4. Stop and Go Determinism की अवधारणा Stop (रुकने का संकेत) जहाँ प्राकृतिक परिस्थितियाँ प्रतिकूल हों जैसे— अत्यधिक मरुस्थल, ध्रुवीय क्षेत्र Go (आगे बढ़ने का संकेत) जहाँ प्राकृतिक संसाधन व परिस्थितियाँ अनुकूल हों जैसे— नदी घाट...

II HG Possibilism संभावनावाद

 संभावनावाद (Possibilism)   संभावनावाद मानव भूगोल की एक प्रमुख विचारधारा है, जिसने मानव-पर्यावरण संबंधों को समझने की दिशा में संतुलित और व्यवहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। यह विचारधारा पर्यावरण नियतिवाद की एकांगी व्याख्या के प्रतिवाद के रूप में विकसित हुई। 1. संभावनावाद का अर्थ (Meaning of Possibilism) संभावनावाद का आशय यह है कि पर्यावरण मानव के सामने अनेक संभावनाएँ प्रस्तुत करता है, परन्तु उनमें से किस संभावना का चयन होगा, यह मानव की बुद्धि, तकनीक, संस्कृति और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है। अर्थात् पर्यावरण मानव को बाध्य नहीं करता, बल्कि विकल्प देता है। प्रसिद्ध कथन – 👉 “Environment offers possibilities, man chooses.” 2. उद्भव एवं पृष्ठभूमि 19वीं शताब्दी के अंत तक पर्यावरण नियतिवाद का प्रभुत्व था, जिसमें मानव को प्रकृति का दास माना गया। इसके विरोध में फ्रांस में संभावनावाद का विकास हुआ। इस विचारधारा ने मानव की सक्रिय भूमिका पर बल दिया। 3. संभावनावाद के प्रवर्तक एवं प्रमुख विद्वान (1) पॉल विडाल द ला ब्लाश (Paul Vidal de la Blache) संभावनावाद के प्रमुख प्र...

VI EG 1 Fishing & Livestock Raising

मानव के मौलिक व्यवसाय (Fundamental Occupations of Man) मत्स्य पालन (Fishing) एवं पशुपालन (Livestock Raising) 1. मानव के मौलिक व्यवसाय – परिचय मानव के वे व्यवसाय जिनका संबंध सीधे प्राकृतिक संसाधनों से होता है और जो मानव की आजीविका के प्रारंभिक साधन रहे हैं, उन्हें मौलिक या आधारभूत व्यवसाय कहा जाता है। इनमें मुख्यतः— शिकार संग्रहण मत्स्य पालन पशुपालन आदिम कृषि आर्थिक भूगोल में मत्स्य पालन और पशुपालन को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। 2. मत्स्य पालन (Fishing) (i) अर्थ जलाशयों (समुद्र, नदी, झील, तालाब आदि) से मछलियों एवं अन्य जलीय जीवों को पकड़ने, पालने तथा उनका व्यवसायिक उपयोग करने की क्रिया को मत्स्य पालन कहते हैं। (ii) मत्स्य पालन के प्रकार 1. आंतरिक मत्स्य पालन (Inland Fishing) नदियाँ – गंगा, ब्रह्मपुत्र, गोदावरी झीलें, तालाब, जलाशय कम लागत वाला भारत में अधिक प्रचलित 2. समुद्री मत्स्य पालन (Marine Fishing) समुद्रों व महासागरों में आधुनिक नौकाएँ, ट्रॉलर्स, फ्रीजर तटीय देश अधिक लाभान्वित (iii) मत्स्य पालन को प्रभावित करने वाले कारक जल की उपलब्धता तापमान प्लवक (Plankton) आधुनिक तकनीक ...