II HG l Neo-Determinism नव निश्चयवाद


नव-निर्धारणवाद (Neo-Determinism)

1. नव-निर्धारणवाद का अर्थ

नव-निर्धारणवाद मानव भूगोल की एक आधुनिक विचारधारा है, जिसके अनुसार

प्राकृतिक पर्यावरण मनुष्य को पूर्णतः नियंत्रित नहीं करता, बल्कि

मनुष्य को कुछ सीमाओं (limits) के भीतर कार्य करने की स्वतंत्रता देता है।

इसे सामान्य शब्दों में “Stop and Go Determinism” भी कहा जाता है।

2. नव-निर्धारणवाद की उत्पत्ति

नव-निर्धारणवाद का विकास पर्यावरण निर्धारणवाद और संभाव्यवाद के बीच संतुलन स्थापित करने हेतु हुआ।

यह सिद्धांत यह स्वीकार करता है कि—

प्रकृति पूर्ण स्वामी नहीं है

और न ही मनुष्य पूर्ण स्वतंत्र

3. नव-निर्धारणवाद के प्रवर्तक

➡️ ग्रिफ़िथ टेलर (Griffith Taylor)

इन्होंने ही Stop and Go Determinism की अवधारणा प्रस्तुत की।

टेलर के अनुसार प्रकृति मनुष्य को

👉 कहाँ रुकना है (Stop)

👉 और कहाँ आगे बढ़ना है (Go)

यह संकेत देती है।

4. Stop and Go Determinism की अवधारणा

Stop (रुकने का संकेत)

जहाँ प्राकृतिक परिस्थितियाँ प्रतिकूल हों

जैसे— अत्यधिक मरुस्थल, ध्रुवीय क्षेत्र

Go (आगे बढ़ने का संकेत)

जहाँ प्राकृतिक संसाधन व परिस्थितियाँ अनुकूल हों

जैसे— नदी घाटियाँ, उपजाऊ मैदान

👉 मनुष्य तकनीक की सहायता से आगे बढ़ सकता है,

लेकिन प्रकृति की सीमाओं को पूर्णतः लाँघ नहीं सकता।

5. नव-निर्धारणवाद की प्रमुख विशेषताएँ

प्रकृति मार्गदर्शक की भूमिका निभाती है

मनुष्य विवेकशील प्राणी है

तकनीक का सीमित उपयोग संभव

पर्यावरणीय संतुलन पर बल

मानव-प्रकृति के बीच सामंजस्य

6. नव-निर्धारणवाद के उदाहरण

मरुस्थल में सीमित कृषि (सिंचाई द्वारा)

पहाड़ी क्षेत्रों में सीढ़ीनुमा खेती

नदी घाटियों में सभ्यताओं का विकास

अत्यधिक शीत प्रदेशों में सीमित जनसंख्या

7. निर्धारणवाद, संभाव्यवाद एवं नव-निर्धारणवाद में अंतर

आधार

निर्धारणवाद

संभाव्यवाद

नव-निर्धारणवाद

प्रकृति की भूमिका

पूर्ण नियंत्रक

सीमित

मार्गदर्शक

मनुष्य की भूमिका

निष्क्रिय

पूर्ण स्वतंत्र

विवेकपूर्ण

तकनीक

नगण्य

अत्यधिक

संतुलित

दृष्टिकोण

कठोर

उदार

व्यावहारिक

8. नव-निर्धारणवाद का महत्व

पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा

सतत विकास की अवधारणा

यथार्थवादी दृष्टिकोण

आधुनिक भूगोल के अनुकूल

9. नव-निर्धारणवाद की आलोचना

सीमाएँ स्पष्ट नहीं बताई गईं

तकनीकी विकास को कम आँका गया

सभी क्षेत्रों पर समान रूप से लागू नहीं

10. निष्कर्ष

नव-निर्धारणवाद मानव भूगोल की वह विचारधारा है जो

प्रकृति और मनुष्य के बीच संतुलित संबंध को स्वीकार करती है।

यह सिद्धांत आज के पर्यावरणीय संकट और सतत विकास की अवधारणा के लिए अत्यंत उपयोगी है।

📌 परीक्षा हेतु महत्त्वपूर्ण पंक्ति

“प्रकृति मनुष्य को चलने की दिशा बताती है, पर गति मनुष्य स्वयं तय करता है।”

यदि चाहें तो मैं इसे

✅ लघु / अति लघु उत्तर,

✅ MCQ,

✅ तुलनात्मक प्रश्न,

या 5–10 अंक के उत्तर फॉर्मेट में भी तैयार कर सकता हूँ।

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