VI EG I Animal resources
पशु संसाधन : अर्थ
आर्थिक भूगोल में पशु संसाधन से तात्पर्य उन पालतू एवं उपयोगी पशुओं से है जिनसे मनुष्य को आर्थिक, सामाजिक एवं पोषण संबंधी लाभ प्राप्त होते हैं।
इनमें गाय, भैंस, भेड़, बकरी, ऊँट, घोड़ा, सूअर, मुर्गी, मछली आदि शामिल हैं।
पशु संसाधनों का आर्थिक महत्व
पशु संसाधन मानव जीवन और अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं—
खाद्य आपूर्ति
दूध, दही, घी, मांस, अंडा आदि
कृषि में सहयोग
हल चलाना, परिवहन, गोबर खाद
कच्चा माल
ऊन, चमड़ा, हड्डियाँ, सींग
रोजगार का साधन
पशुपालन, डेयरी, पोल्ट्री, चमड़ा उद्योग
ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार
भूमिहीन किसानों के लिए आय का मुख्य स्रोत
पशु संसाधनों के प्रकार
1. दुधारू पशु
गाय, भैंस, ऊँट, याक
भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश
2. कार्यकारी पशु
बैल, घोड़ा, ऊँट, खच्चर
कृषि व परिवहन में उपयोग
3. ऊन उत्पादक पशु
भेड़, बकरी, अल्पाका
शीतोष्ण एवं शुष्क प्रदेशों में प्रमुख
4. मांस एवं अंडा उत्पादक पशु
मुर्गी, सूअर, बकरी, भेड़
पोल्ट्री उद्योग का तीव्र विकास
विश्व में पशु संसाधनों का वितरण
भारत, चीन – पशुधन संख्या में अग्रणी
ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड – भेड़ पालन
अर्जेंटीना, ब्राजील – मांस उत्पादन
यूरोप – डेयरी व उन्नत पशुपालन
भारत में पशु संसाधन
भारत के पास विश्व की सबसे अधिक पशुधन जनसंख्या
प्रमुख राज्य:
राजस्थान – ऊँट, भेड़
उत्तर प्रदेश – गाय, भैंस
पंजाब, हरियाणा – डेयरी विकास
ऑपरेशन फ्लड (श्वेत क्रांति) से दुग्ध उत्पादन में वृद्धि
पशु संसाधनों से संबंधित समस्याएँ
चरागाह भूमि की कमी
नस्ल सुधार का अभाव
पशु रोग व चिकित्सा सुविधाओं की कमी
चारे की कमी
परंपरागत पशुपालन पद्धतियाँ
संरक्षण एवं विकास के उपाय
उन्नत नस्लों का विकास
पशु चिकित्सा सेवाओं का विस्तार
चारा उत्पादन में वृद्धि
डेयरी व पोल्ट्री को प्रोत्साहन
सरकारी योजनाएँ व सहकारी समितियाँ
निष्कर्ष
पशु संसाधन आर्थिक भूगोल का एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटक है, जो
✔ कृषि
✔ उद्योग
✔ रोजगार
✔ पोषण
✔ ग्रामीण विकास
— सभी को प्रभावित करता है।
इसके संरक्षण एवं वैज्ञानिक विकास से देश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ किया जा सकता है।
अगर
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