Unit III 2. Pollution — Air, Water, Soil and Noise & Measures for Control

जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर

पर्यावरण भूगोल

प्रकरण: Pollution — Air, Water, Soil and Noise & Measures for Control


1. प्रदूषण का अर्थ एवं परिभाषा

प्रदूषण (Pollution) से आशय पर्यावरण के वायु, जल, मृदा आदि घटकों में ऐसे अवांछित पदार्थों, ऊर्जा अथवा जीवों का प्रवेश है, जिससे प्राकृतिक पर्यावरण की गुणवत्ता में कमी आती है तथा मानव, वनस्पति, जीव-जंतु और पारिस्थितिक तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।


प्रमुख परिभाषा

पर्यावरण प्रदूषण वह स्थिति है जिसमें पर्यावरण के भौतिक, रासायनिक या जैविक गुणों में अवांछनीय परिवर्तन उत्पन्न होकर जीव-जगत के लिए हानिकारक परिस्थितियाँ पैदा करता है।


प्रदूषण के प्रमुख प्रकार

1. वायु प्रदूषण — Air Pollution

2. जल प्रदूषण — Water Pollution

3. मृदा/भूमि प्रदूषण — Soil/Land Pollution

4. ध्वनि प्रदूषण — Noise Pollution



2. वायु प्रदूषण (Air Pollution)

अर्थ

वायुमंडल में धूल, धुआँ, विषैली गैसों, सूक्ष्म कणों तथा अन्य हानिकारक पदार्थों की मात्रा का प्राकृतिक स्तर से अधिक हो जाना वायु प्रदूषण कहलाता है।


प्रमुख वायु प्रदूषक

प्रदूषक प्रमुख स्रोत प्रभाव

CO — कार्बन मोनोऑक्साइड वाहन, अपूर्ण दहन रक्त की ऑक्सीजन वहन क्षमता कम

SO₂ — सल्फर डाइऑक्साइड कोयला, उद्योग श्वसन रोग, अम्लीय वर्षा

NOx वाहन, ताप विद्युत संयंत्र स्मॉग, अम्लीय वर्षा

CO₂ जीवाश्म ईंधन वैश्विक तापन

PM₂.₅ एवं PM₁₀ धूल, वाहन, उद्योग फेफड़ों एवं हृदय पर प्रभाव

ओजोन (O₃) रासायनिक अभिक्रियाओं से श्वसन तंत्र को नुकसान

धूल एवं धुआँ निर्माण, उद्योग श्वसन संबंधी समस्या



वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोत

प्राकृतिक स्रोत

ज्वालामुखी विस्फोट

वनाग्नि

धूल भरी आँधियाँ

परागकण

दलदली क्षेत्रों से गैसों का उत्सर्जन


मानवीय स्रोत

मोटर वाहन

औद्योगिक इकाइयाँ

ताप विद्युत गृह

घरेलू ईंधन

कृषि अवशेष जलाना

निर्माण कार्य

खनन



वायु प्रदूषण के प्रभाव

मानव पर

दमा एवं ब्रोंकाइटिस

फेफड़ों की क्षमता में कमी

हृदय संबंधी समस्याएँ

आँखों में जलन

श्वसन संबंधी रोग



पर्यावरण पर

अम्लीय वर्षा

वैश्विक तापन

ओजोन परत पर प्रभाव

दृश्यता में कमी

वनस्पति की वृद्धि में बाधा



वायु प्रदूषण नियंत्रण के उपाय

1. सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना।

2. विद्युत एवं स्वच्छ ईंधन आधारित वाहनों को प्रोत्साहित करना।

3. उद्योगों में filters, scrubbers और electrostatic precipitators का प्रयोग।

4. कारखानों की चिमनियों की उचित ऊँचाई एवं नियंत्रण व्यवस्था।

5. कृषि अवशेष जलाने पर नियंत्रण।

6. बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण।

7. नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार।

8. निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण।

9. वाहनों का नियमित प्रदूषण परीक्षण।

10. स्वच्छ ईंधन एवं ऊर्जा दक्ष तकनीक अपनाना।



3. जल प्रदूषण (Water Pollution)

अर्थ

जल के भौतिक, रासायनिक या जैविक गुणों में ऐसा अवांछनीय परिवर्तन जिससे जल मानव, पशु-पक्षियों, वनस्पतियों अथवा जलीय जीवों के लिए अनुपयुक्त हो जाए, जल प्रदूषण कहलाता है।


जल प्रदूषण के स्रोत

प्राकृतिक स्रोत

मृदा अपरदन

खनिजों का प्राकृतिक अपक्षय

जैविक पदार्थों का अपघटन



मानवीय स्रोत

घरेलू सीवेज

औद्योगिक अपशिष्ट

कृषि रसायन

उर्वरक एवं कीटनाशक

तेल रिसाव

प्लास्टिक कचरा

धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियाँ

खनन



प्रमुख जल प्रदूषक

रोगजनक सूक्ष्मजीव

जैविक अपशिष्ट

भारी धातुएँ

नाइट्रेट एवं फॉस्फेट

कीटनाशक

तेल

प्लास्टिक

औद्योगिक रसायन



जल प्रदूषण के प्रभाव

1. पेचिश, हैजा, टाइफाइड जैसी जलजनित बीमारियाँ।

2. पेयजल की गुणवत्ता में कमी।

3. जलीय जीवों की मृत्यु।

4. Eutrophication (सुपोषण) की समस्या।

5. जल में घुलित ऑक्सीजन की कमी।

6. खाद्य श्रृंखला में विषैले पदार्थों का संचय।

7. भूजल प्रदूषण।

8. कृषि उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव।




जल प्रदूषण नियंत्रण के उपाय

1. घरेलू सीवेज का उपचार करके ही जल स्रोतों में छोड़ना।

2. उद्योगों में Effluent Treatment Plants (ETP) लगाना।

3. कृषि में उर्वरकों एवं कीटनाशकों का विवेकपूर्ण उपयोग।

4. नदियों एवं झीलों में कचरा डालने पर नियंत्रण।

5. प्लास्टिक प्रदूषण को कम करना।

6. वर्षा जल संचयन।

7. जल पुनर्चक्रण एवं पुनः उपयोग।

8. औद्योगिक अपशिष्टों की नियमित निगरानी।

9. जल स्रोतों के आसपास हरित पट्टी विकसित करना।

10. जन-जागरूकता बढ़ाना।





4. मृदा प्रदूषण (Soil Pollution)

अर्थ

मृदा में हानिकारक रसायनों, ठोस अपशिष्टों, भारी धातुओं तथा अन्य प्रदूषकों के अत्यधिक संचय से मृदा की प्राकृतिक गुणवत्ता, उर्वरता और जैविक गतिविधियों में कमी आना मृदा प्रदूषण कहलाता है।


मृदा प्रदूषण के प्रमुख स्रोत

रासायनिक उर्वरक

कीटनाशक एवं खरपतवारनाशी

औद्योगिक ठोस अपशिष्ट

प्लास्टिक एवं पॉलीथीन

खनन गतिविधियाँ

नगरों का ठोस कचरा

सीवेज

भारी धातुएँ

ई-कचरा



मृदा प्रदूषण के प्रभाव

1. मृदा की उर्वरता में कमी।

2. सूक्ष्मजीवों की संख्या एवं गतिविधि में कमी।

3. कृषि उत्पादों में विषैले पदार्थों का प्रवेश।

4. भूजल प्रदूषण।

5. जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव।

6. खाद्य श्रृंखला में विषैले पदार्थों का संचय।

7. भूमि की उत्पादकता में कमी।

8. मरुस्थलीकरण की प्रक्रिया को बढ़ावा।




नियंत्रण के उपाय

1. जैविक एवं प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन।

2. रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग।

3. जैव उर्वरकों एवं जैव कीटनाशकों का प्रयोग।

4. ठोस अपशिष्ट का पृथक्करण।

5. Reduce, Reuse, Recycle को अपनाना।

6. प्लास्टिक उपयोग में कमी।

7. औद्योगिक अपशिष्ट का सुरक्षित निपटान।

8. खनन क्षेत्रों में भूमि पुनर्वास।

9. वृक्षारोपण एवं वनीकरण।

10. मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरक उपयोग।



5. ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution)

अर्थ


अनावश्यक, अप्रिय एवं अत्यधिक तीव्र ध्वनि जो मानव तथा अन्य जीवों के स्वास्थ्य और सामान्य जीवन को प्रभावित करती है, ध्वनि प्रदूषण कहलाती है।


प्रमुख स्रोत

सड़क यातायात


रेलवे


हवाई जहाज


औद्योगिक मशीनें


निर्माण कार्य


लाउडस्पीकर


जनरेटर


घरेलू उपकरण


पटाखे



ध्वनि की माप


ध्वनि की तीव्रता को सामान्यतः डेसीबल (Decibel—dB) में मापा जाता है।


ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव


मानव स्वास्थ्य पर


सुनने की क्षमता में कमी


अनिद्रा


तनाव एवं चिड़चिड़ापन


सिरदर्द


उच्च रक्तचाप


एकाग्रता में कमी


कार्यक्षमता में कमी



अन्य जीवों पर


पक्षियों के व्यवहार में परिवर्तन


वन्यजीवों के संचार में बाधा


प्रजनन एवं आवासीय व्यवहार पर प्रभाव



ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण


1. वाहनों में हॉर्न के अनावश्यक प्रयोग पर नियंत्रण।



2. औद्योगिक क्षेत्रों में ध्वनि अवरोधक लगाना।



3. मशीनों का नियमित रखरखाव।



4. आवासीय क्षेत्रों में हरित पट्टियाँ।



5. लाउडस्पीकर की ध्वनि एवं समय पर नियंत्रण।



6. अस्पताल, विद्यालय आदि के आसपास Silence Zone विकसित करना।



7. निर्माण कार्यों में कम-शोर वाली मशीनों का उपयोग।



8. पटाखों के उपयोग को सीमित करना।



9. श्रमिकों को कानों की सुरक्षा के उपकरण उपलब्ध कराना।



10. यातायात प्रबंधन में सुधार।





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6. प्रदूषण नियंत्रण के समग्र उपाय


प्रदूषण किसी एक माध्यम तक सीमित नहीं है। इसलिए Integrated Pollution Control Approach आवश्यक है।


प्रमुख उपाय


1. रोकथाम (Prevention)

प्रदूषण उत्पन्न होने के बाद उपचार करने के बजाय स्रोत पर ही प्रदूषण को रोकना।


2. पुनर्चक्रण (Recycling)

कचरे को संसाधन के रूप में पुनः उपयोग करना।


3. पुनः उपयोग (Reuse)

वस्तुओं का दोबारा उपयोग करके अपशिष्ट कम करना।


4. स्वच्छ तकनीक (Clean Technology)

कम प्रदूषण वाली तकनीकों को अपनाना।


5. नवीकरणीय ऊर्जा

सौर, पवन, जल एवं अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का विस्तार।


6. पर्यावरणीय शिक्षा

जनता में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना।


7. कानून एवं प्रशासन

पर्यावरणीय मानकों का पालन तथा प्रदूषणकारी गतिविधियों की निगरानी।


8. वृक्षारोपण

वायु प्रदूषण नियंत्रण, मृदा संरक्षण और जैव विविधता के लिए वनीकरण।


9. सतत विकास

आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना।



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7. चारों प्रदूषणों का तुलनात्मक अध्ययन


आधार वायु जल मृदा ध्वनि


मुख्य माध्यम वायुमंडल नदियाँ, झीलें, भूजल भूमि/मृदा ध्वनि तरंगें

प्रमुख स्रोत वाहन, उद्योग सीवेज, उद्योग रसायन, कचरा यातायात, मशीनें

प्रमुख प्रभाव श्वसन रोग जलजनित रोग उर्वरता में कमी श्रवण एवं मानसिक प्रभाव

प्रमुख नियंत्रण स्वच्छ ईंधन जल उपचार जैविक खेती ध्वनि नियंत्रण




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8. परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु


अति लघु उत्तरीय प्रश्न


प्रश्न: वायु प्रदूषण क्या है?

उत्तर: वायुमंडल में हानिकारक गैसों, कणों एवं अन्य पदार्थों की मात्रा का प्राकृतिक स्तर से अधिक होना वायु प्रदूषण है।


प्रश्न: ध्वनि की तीव्रता किसमें मापी जाती है?

उत्तर: डेसीबल (dB) में।


प्रश्न: जल प्रदूषण का प्रमुख जैविक प्रभाव क्या है?

उत्तर: जल में ऑक्सीजन की कमी तथा जलीय जीवों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव।


प्रश्न: मृदा प्रदूषण का प्रमुख कारण क्या है?

उत्तर: रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों, औद्योगिक अपशिष्ट एवं ठोस कचरे का अत्यधिक संचय।



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9. दीर्घ उत्तरीय परीक्षा प्रश्न


प्रश्न 1.


“वायु प्रदूषण के कारण, प्रभाव एवं नियंत्रण के उपायों की विवेचना कीजिए।”


प्रश्न 2.


“जल प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों तथा उसके नियंत्रण के उपायों को समझाइए।”


प्रश्न 3.


“मृदा प्रदूषण के कारण एवं पर्यावरण पर इसके प्रभावों की व्याख्या कीजिए।”


प्रश्न 4.


“ध्वनि प्रदूषण क्या है? इसके स्रोत, प्रभाव एवं नियंत्रण के उपायों का वर्णन कीजिए।”


प्रश्न 5.


“वायु, जल, मृदा एवं ध्वनि प्रदूषण का तुलनात्मक अध्ययन कीजिए।”


प्रश्न 6.


“प्रदूषण नियंत्रण के विभिन्न उपायों की विस्तार से विवेचना कीजिए।”



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निष्कर्ष


प्रदूषण आधुनिक पर्यावरणीय समस्याओं में सबसे महत्वपूर्ण समस्या है। वायु, जल, मृदा एवं ध्वनि प्रदूषण एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और इनके कारण मानव स्वास्थ्य, जैव विविधता तथा पारिस्थितिक संतुलन प्रभावित होता है। इसलिए केवल प्रदूषण को नियंत्रित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रदूषण की रोकथाम, संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग, स्वच्छ तकनीक, पुनर्चक्रण, पर्यावरणीय कानून और जनभागीदारी के माध्यम से सतत पर्यावरणीय विकास सुनिश्चित करना आवश्यक है।


⭐ परीक्षा में याद रखने योग्य सूत्र


“स्रोत → प्रदूषक → प्रभाव → नियंत्रण”


किसी भी प्रदूषण पर उत्तर लिखते समय यही क्रम अपनाएँ। इससे उत्तर व्यवस्थित, वैज्ञानिक और परीक्षा की दृष्टि से प्रभावी बनेगा।












🌍 पर्यावरण भूगोल की विषय-वस्तु

पर्यावरण भूगोल (Environmental Geography) भूगोल की वह शाखा है जो मानव और पर्यावरण के बीच पारस्परिक संबंधों का अध्ययन करती है। इसकी विषय-वस्तु निम्न प्रकार है –

  1. प्राकृतिक पर्यावरण का अध्ययन

    • स्थलाकृति, जलवायु, मृदा, जल, वनस्पति, जीव-जंतु इत्यादि।
  2. मानव पर्यावरण संबंध

    • मानव किस प्रकार पर्यावरण से संसाधन प्राप्त करता है और उसका उपयोग करता है।
  3. पर्यावरणीय परिवर्तन

    • वनों की कटाई, मरुस्थलीकरण, प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग, ओजोन क्षय।
  4. सतत विकास एवं पर्यावरणीय नीतियाँ

    • पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग।
  5. मानव गतिविधियों का प्रभाव

    • शहरीकरण, औद्योगीकरण, कृषि, परिवहन और ऊर्जा उत्पादन का पर्यावरण पर प्रभाव।

👨‍👩‍👦 मानव–पर्यावरण संबंध : विस्तृत व्याख्या

मानव और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक हैं। इतिहास में मानव–पर्यावरण संबंध को तीन प्रमुख चरणों में समझा जा सकता है:

1. नियतिवाद (Determinism)

  • इसमें माना गया कि मानव पूर्णत: प्रकृति पर निर्भर है।
  • प्राचीन और मध्यकालीन काल में मानव अपनी आवश्यकताओं के लिए प्रकृति पर निर्भर था।
  • उदाहरण: नदी घाटी सभ्यताएँ (सिंधु घाटी, मिस्र) नदियों पर आधारित थीं।

2. संभाव्यवाद (Possibilism)

  • मानव को पर्यावरणीय परिस्थितियों के भीतर विकल्प चुनने और विकास करने की स्वतंत्रता मिली।
  • तकनीकी प्रगति ने मानव को पर्यावरण पर नियंत्रण पाने की क्षमता दी।
  • उदाहरण: रेगिस्तान में नहरें और सिंचाई परियोजनाएँ, समुद्र पर पुल और सुरंग निर्माण।

3. नव-नियतिवाद (Neo-Determinism या मध्य मार्ग)

  • इसमें माना गया कि मानव पर्यावरण का उपयोग कर सकता है लेकिन उसकी सीमाएँ भी हैं।
  • यदि मानव प्राकृतिक संसाधनों का अति-शोषण करेगा तो पर्यावरण संकट खड़ा होगा।
  • उदाहरण: प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाएँ मानव को चेतावनी देती हैं।

✨ निष्कर्ष

पर्यावरण भूगोल यह स्पष्ट करता है कि मानव और पर्यावरण का संबंध गतिशील और परस्पर निर्भर है।

  • यदि मानव प्रकृति का संतुलित उपयोग करता है तो सतत विकास संभव है।
  • लेकिन शोषण और अव्यवस्थित विकास से पर्यावरणीय संकट उत्पन्न होता है।






🌍 Environmental Geography

Environmental Geography is the branch of geography that studies the interaction between humans and the environment. Its subject matter is as follows –

Study of natural environment

Topography, climate, soil, water, vegetation, fauna, etc.

Human environment relationship

How humans obtain and use resources from the environment.

Environmental change

Deforestation, desertification, pollution, global warming, ozone depletion.

Sustainable development and environmental policies

Environmental protection, pollution control, balanced use of natural resources.

Impact of human activities

Impact of urbanization, industrialization, agriculture, transportation and energy production on the environment.

 👨‍👩‍👦 Human–Environment Relationship: Detailed Explanation

Humans and the environment complement each other. Human–environment relationship can be understood in three major phases in history:

1. Determinism

It believed that humans are completely dependent on nature.

In ancient and medieval times, humans were dependent on nature for their needs.

Example: River valley civilizations (Indus Valley, Egypt) were based on rivers.

2. Possibilism

Humans got the freedom to choose options and develop within environmental conditions.

Technological progress gave humans the ability to gain control over the environment.

Example: Canals and irrigation projects in deserts, bridges and tunnels construction over the sea.

3. Neo-Determinism or Middle Path

It believed that humans can use the environment but there are limitations too.

 If humans over-exploit natural resources, environmental crisis will arise.

Examples: Pollution, climate change and natural disasters warn humans.

✨ Conclusion

Environmental geography makes it clear that the relationship between humans and the environment is dynamic and interdependent.

Sustainable development is possible if humans use nature in a balanced way.

But exploitation and disorderly development lead to environmental  Environmental crisis.

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