Unit IV Acid Rain, Health Hazards एवं Energy Crisis

Environmental Hazards

पर्यावरणीय खतरे — El-Niño, Global Warming, Acid Rain, Health Hazards एवं Energy Crisis


1. पर्यावरणीय खतरे का अर्थ

(Meaning of Environmental Hazards)

पर्यावरणीय खतरे वे प्राकृतिक अथवा मानवजनित परिस्थितियाँ हैं, जो मानव जीवन, स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था, प्राकृतिक संसाधनों तथा पारिस्थितिक तंत्र को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करती हैं।

सरल परिभाषा

> पर्यावरणीय खतरा वह स्थिति है जिसमें पर्यावरणीय परिवर्तन या प्रदूषण के कारण मानव एवं अन्य जीवों के लिए हानि की संभावना उत्पन्न होती है।


प्रमुख पर्यावरणीय खतरे

इस प्रकरण में मुख्यतः निम्न का अध्ययन किया जाता है—

1. El-Niño (अल-नीनो)

2. Global Warming (वैश्विक तापन)

3. Acid Rain (अम्लीय वर्षा)

4. Health Hazards (स्वास्थ्य संबंधी खतरे)

5. Energy Crisis (ऊर्जा संकट)


2. El-Niño — अल-नीनो

2.1 अर्थ

El-Niño एक आवधिक महासागरीय-वायुमंडलीय घटना है, जिसमें उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के मध्य एवं पूर्वी भाग के समुद्री सतही जल का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है।

El-Niño स्पेनिश शब्द है, जिसका अर्थ “बालक” है। यह नाम दक्षिण अमेरिका के तट के मछुआरों द्वारा इस घटना के लिए प्रयोग किया गया था।


2.2 सामान्य परिस्थितियों में प्रशांत महासागर

सामान्य स्थिति में—

व्यापारिक पवनें (Trade Winds) पूर्व से पश्चिम की ओर चलती हैं।

गर्म जल पश्चिमी प्रशांत की ओर एकत्र होता है।

पश्चिमी प्रशांत में समुद्र की सतह अपेक्षाकृत गर्म होती है।

पूर्वी प्रशांत में ठंडा जल ऊपर आता है।


इस प्रक्रिया को अपवेलिंग (Upwelling) कहते हैं।



सामान्य स्थिति


पूर्वी प्रशांत → ठंडा जल

पश्चिमी प्रशांत → गर्म जल



---


2.3 El-Niño के समय क्या होता है?


El-Niño की स्थिति में व्यापारिक पवनें कमजोर पड़ सकती हैं।


इसके परिणामस्वरूप—


गर्म समुद्री जल पूर्वी प्रशांत की ओर फैलता है

↓

समुद्र की सतह का तापमान बढ़ता है

↓

वायुमंडलीय परिसंचरण में परिवर्तन

↓

विश्व के विभिन्न क्षेत्रों के मौसम में परिवर्तन



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2.4 El-Niño के प्रमुख प्रभाव


1. वर्षा में परिवर्तन


कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा तथा कुछ क्षेत्रों में सूखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।


2. सूखा


प्रशांत क्षेत्र से दूर कुछ क्षेत्रों में वर्षा कम होने से सूखे की संभावना बढ़ सकती है।


3. बाढ़


कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक वर्षा होने के कारण बाढ़ आ सकती है।


4. कृषि पर प्रभाव


वर्षा एवं तापमान में परिवर्तन से—


फसल उत्पादन


बुवाई का समय


सिंचाई की आवश्यकता


खाद्य सुरक्षा



प्रभावित हो सकते हैं।


5. मत्स्य उद्योग पर प्रभाव


पूर्वी प्रशांत में ठंडे पोषक तत्वों से भरपूर जल के ऊपर आने की प्रक्रिया कमजोर होने से समुद्री जैव उत्पादकता प्रभावित हो सकती है।



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2.5 El-Niño और भारत


El-Niño का संबंध भारतीय मानसून से महत्वपूर्ण माना जाता है। कई El-Niño वर्षों में भारतीय मानसून कमजोर रहने की संभावना बढ़ सकती है, जिससे कुछ क्षेत्रों में सूखे का खतरा उत्पन्न हो सकता है।


संभावित प्रभाव


El-Niño → मानसून की अनिश्चितता/कमजोरी की संभावना → वर्षा में कमी → कृषि पर प्रभाव → सूखे की संभावना


लेकिन यह संबंध पूर्णतः निश्चित या हर वर्ष समान नहीं होता, क्योंकि भारतीय मानसून अनेक महासागरीय एवं वायुमंडलीय कारकों से प्रभावित होता है।



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3. Global Warming — वैश्विक तापन

3.1 अर्थ


पृथ्वी के औसत सतही तापमान में दीर्घकालीन वृद्धि को वैश्विक तापन (Global Warming) कहते हैं।


इसका प्रमुख कारण वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों की बढ़ती सांद्रता है।


3.2 ग्रीनहाउस प्रभाव

पृथ्वी सूर्य से ऊर्जा प्राप्त करती है। पृथ्वी इस ऊर्जा के एक भाग को अवशोषित करके पुनः ऊष्मा के रूप में विकिरित करती है।


वायुमंडल की कुछ गैसें इस ऊष्मा के एक भाग को अवशोषित कर पुनः पृथ्वी की ओर भेजती हैं।


इसे ग्रीनहाउस प्रभाव (Greenhouse Effect) कहते हैं।


प्रमुख ग्रीनहाउस गैसें


कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂)


मीथेन (CH₄)


नाइट्रस ऑक्साइड (N₂O)


जलवाष्प


ओजोन


कुछ मानव निर्मित गैसें



महत्वपूर्ण बात


प्राकृतिक ग्रीनहाउस प्रभाव जीवन के लिए आवश्यक है, लेकिन मानव गतिविधियों के कारण ग्रीनहाउस गैसों में वृद्धि से अतिरिक्त ऊष्मीकरण होता है।



3.3 वैश्विक तापन के प्रमुख कारण

प्राकृतिक कारण

ज्वालामुखीय गतिविधियाँ

सौर विकिरण में परिवर्तन

प्राकृतिक जलवायु परिवर्तन


मानवजनित कारण

1. जीवाश्म ईंधनों का दहन

कोयला, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस जलाने से CO₂ उत्सर्जन बढ़ता है।


2. वनों की कटाई

वन CO₂ को अवशोषित करते हैं। वनों की कमी से कार्बन अवशोषण क्षमता घटती है।


3. औद्योगीकरण

औद्योगिक गतिविधियों से विभिन्न ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है।


4. परिवहन

वाहनों से CO₂ एवं अन्य प्रदूषक गैसें निकलती हैं।


5. कृषि

धान की खेती एवं पशुपालन से मीथेन उत्सर्जन हो सकता है।


6. शहरीकरण

ऊर्जा की अधिक खपत और भूमि उपयोग परिवर्तन तापीय प्रभावों को बढ़ा सकते हैं।



3.4 वैश्विक तापन के प्रमुख प्रभाव

1. हिमनदों का पिघलना

तापमान बढ़ने से हिमनदों एवं हिमावरण में परिवर्तन हो सकता है।


2. समुद्र तल में वृद्धि

समुद्री जल के तापीय प्रसार तथा स्थल-आधारित बर्फ के पिघलने से समुद्र स्तर बढ़ सकता है।


3. चरम मौसम

अत्यधिक गर्मी

भारी वर्षा

सूखा

बाढ़

चक्रवातों के प्रभाव में परिवर्तन

जैसी घटनाओं का जोखिम बढ़ सकता है।


4. कृषि पर प्रभाव

तापमान और वर्षा में परिवर्तन से कृषि उत्पादकता प्रभावित हो सकती है।


5. जैव विविधता पर प्रभाव

कई प्रजातियों के आवास एवं वितरण क्षेत्र में परिवर्तन हो सकता है।


6. जल संसाधनों पर प्रभाव

हिमनदों, वर्षा एवं वाष्पीकरण में परिवर्तन जल उपलब्धता को प्रभावित कर सकता है।


7. मानव स्वास्थ्य

अत्यधिक गर्मी, वायु प्रदूषण तथा कुछ संक्रामक रोगों के प्रसार की परिस्थितियाँ प्रभावित हो सकती हैं।




3.5 वैश्विक तापन को नियंत्रित करने के उपाय

शमन (Mitigation)

नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार

सौर एवं पवन ऊर्जा का उपयोग

ऊर्जा दक्षता बढ़ाना

सार्वजनिक परिवहन

इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा

वनों का संरक्षण

वृक्षारोपण

औद्योगिक उत्सर्जन में कमी


सतत कृषि


ऊर्जा की बचत



अनुकूलन (Adaptation)


जल संरक्षण


जलवायु-सहिष्णु फसलें


आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली


तटीय सुरक्षा


गर्मी से बचाव की योजनाएँ


जलवायु-स्मार्ट कृषि




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4. Acid Rain — अम्लीय वर्षा


4.1 अर्थ


वायुमंडल में उपस्थित सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) तथा नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOₓ) जैसी गैसें जल एवं अन्य वायुमंडलीय घटकों के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया करके अम्लीय यौगिक बनाती हैं। इनके कारण वर्षा का जल अधिक अम्लीय हो सकता है।


इसे अम्लीय वर्षा (Acid Rain) कहते हैं।



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4.2 अम्लीय वर्षा बनने की प्रक्रिया


मुख्य गैसें


SO₂ + NOₓ


↓


वायुमंडल में ऑक्सीकरण एवं जल के साथ प्रतिक्रिया


↓


सल्फ्यूरिक एवं नाइट्रिक अम्ल


↓


वर्षा/हिम/कोहरे के साथ पृथ्वी पर आगमन


↓


Acid Deposition



---


4.3 अम्लीय वर्षा के प्रमुख स्रोत


मानवजनित स्रोत


1. कोयला आधारित विद्युत संयंत्र



2. उद्योग



3. पेट्रोलियम का दहन



4. वाहन



5. धातु उद्योग



6. औद्योगिक बॉयलर




प्राकृतिक स्रोत


ज्वालामुखीय गतिविधियाँ


जैविक अपघटन आदि




---


4.4 अम्लीय वर्षा के प्रभाव


(A) मृदा पर प्रभाव


मृदा की रासायनिक संरचना में परिवर्तन


आवश्यक पोषक तत्वों का ह्रास


कुछ विषैले तत्वों की घुलनशीलता बढ़ना



(B) वनस्पति पर प्रभाव


पत्तियों को नुकसान


वृक्षों की वृद्धि में कमी


वन पारिस्थितिकी पर प्रतिकूल प्रभाव



(C) जल स्रोतों पर प्रभाव


झीलों एवं जलाशयों के अम्लीकरण से जलीय जीव प्रभावित हो सकते हैं।


(D) इमारतों पर प्रभाव


चूना-पत्थर एवं संगमरमर जैसी सामग्री अम्लीय पदार्थों से क्षतिग्रस्त हो सकती है।


उदाहरण


ऐतिहासिक स्मारकों पर वायु प्रदूषण से होने वाले अम्लीय प्रभावों को पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जाता है।


(E) मानव स्वास्थ्य


अम्लीय वर्षा स्वयं सामान्यतः मानव त्वचा पर सीधे प्रमुख प्रभाव का स्रोत नहीं होती, लेकिन इसके लिए जिम्मेदार SO₂, NOₓ और उनसे बनने वाले सूक्ष्म कण श्वसन एवं हृदय संबंधी स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।



---


4.5 अम्लीय वर्षा की रोकथाम


SO₂ उत्सर्जन में कमी


कम सल्फर वाले ईंधन का प्रयोग


नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग


उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण उपकरण


वाहनों के उत्सर्जन पर नियंत्रण


सार्वजनिक परिवहन


ऊर्जा दक्षता


स्वच्छ ईंधन का उपयोग




---


5. Health Hazards — पर्यावरणीय स्वास्थ्य खतरे


5.1 अर्थ


पर्यावरण में उपस्थित भौतिक, रासायनिक, जैविक एवं सामाजिक कारकों के कारण मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को पर्यावरणीय स्वास्थ्य खतरे (Environmental Health Hazards) कहा जाता है।



---


5.2 पर्यावरणीय स्वास्थ्य खतरों के प्रमुख प्रकार


1. वायु प्रदूषण

प्रमुख प्रदूषक—


PM₂.₅


PM₁₀


CO


SO₂


NO₂


ओजोन



संभावित प्रभाव


अस्थमा


श्वसन संबंधी समस्याएँ


हृदय संबंधी रोगों का जोखिम


फेफड़ों पर प्रभाव


समय से पूर्व मृत्यु का जोखिम




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2. जल प्रदूषण


दूषित जल में रोगजनक सूक्ष्मजीव, रसायन या अन्य प्रदूषक हो सकते हैं।


संभावित रोग


हैजा


टाइफाइड


पेचिश


हेपेटाइटिस के कुछ प्रकार


दस्त संबंधी रोग




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3. मृदा प्रदूषण


कीटनाशकों, भारी धातुओं तथा औद्योगिक अपशिष्टों से मृदा प्रदूषित हो सकती है।


इसके माध्यम से प्रदूषक खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर सकते हैं।



---


4. ध्वनि प्रदूषण


अत्यधिक ध्वनि से—


श्रवण क्षमता में कमी


तनाव


नींद में बाधा


एकाग्रता में कमी


रक्तचाप पर प्रभाव



हो सकता है।



---


5. विकिरण संबंधी खतरे


अत्यधिक आयनीकरण विकिरण से कोशिकाओं एवं ऊतकों को नुकसान हो सकता है।



---


6. तापीय खतरे


अत्यधिक तापमान के कारण—


Heat Exhaustion


Heat Stroke


निर्जलीकरण



जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।



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7. जैविक खतरे


बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी एवं अन्य रोगजनक पर्यावरण के माध्यम से रोग फैला सकते हैं।



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5.3 पर्यावरणीय स्वास्थ्य खतरों की रोकथाम


व्यक्तिगत स्तर


स्वच्छ पेयजल


स्वच्छता


पौष्टिक भोजन


प्रदूषण से बचाव


मास्क का उचित उपयोग


नियमित स्वास्थ्य जाँच



सरकारी/सामुदायिक स्तर


स्वच्छ जल आपूर्ति


सीवेज उपचार


ठोस अपशिष्ट प्रबंधन


वायु प्रदूषण नियंत्रण


स्वच्छ ऊर्जा


पर्यावरणीय कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन


स्वास्थ्य एवं पर्यावरण शिक्षा




---


6. Energy Crisis — ऊर्जा संकट


6.1 अर्थ

जब किसी क्षेत्र या देश में ऊर्जा की माँग और उपलब्ध आपूर्ति के बीच गंभीर असंतुलन उत्पन्न हो जाता है तथा विश्वसनीय, सस्ती और पर्याप्त ऊर्जा उपलब्ध नहीं हो पाती, तो उसे ऊर्जा संकट (Energy Crisis) कहा जाता है।


6.2 ऊर्जा संकट के प्रमुख कारण

1. जनसंख्या वृद्धि

जनसंख्या बढ़ने से ऊर्जा की मांग बढ़ती है।


2. औद्योगीकरण

उद्योगों में बड़ी मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होती है।


3. नगरीकरण


शहरों में—


परिवहन


आवास


उद्योग


बिजली


सेवाओं



के कारण ऊर्जा की खपत अधिक होती है।


4. जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता


कोयला, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस सीमित संसाधन हैं।


5. ऊर्जा का अपव्यय


ऊर्जा के अक्षम उपयोग से उपलब्ध संसाधनों पर दबाव बढ़ता है।


6. ऊर्जा संसाधनों का असमान वितरण


ऊर्जा संसाधन सभी क्षेत्रों में समान रूप से उपलब्ध नहीं हैं।


7. ऊर्जा की बढ़ती वैश्विक मांग


आर्थिक विकास के साथ ऊर्जा की आवश्यकता लगातार बढ़ती है।



---


6.3 ऊर्जा संकट के प्रमुख प्रभाव


आर्थिक प्रभाव


उत्पादन लागत में वृद्धि


महँगाई


औद्योगिक उत्पादन में कमी


परिवहन लागत में वृद्धि



सामाजिक प्रभाव


ऊर्जा की कमी


जीवन स्तर पर प्रभाव


ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा असुरक्षा


रोजगार पर प्रभाव



पर्यावरणीय प्रभाव


जीवाश्म ईंधनों के अधिक उपयोग से—


वायु प्रदूषण


ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन


वैश्विक तापन


पारिस्थितिक क्षति



बढ़ सकती है।



---


6.4 ऊर्जा संकट के समाधान


1. नवीकरणीय ऊर्जा


सौर ऊर्जा


पवन ऊर्जा


जलविद्युत


बायोमास


भू-तापीय ऊर्जा


समुद्री ऊर्जा



2. ऊर्जा संरक्षण


“ऊर्जा बचाना ही ऊर्जा का उत्पादन करना है।”


ऊर्जा दक्ष उपकरण


LED


ऊर्जा-कुशल भवन


सार्वजनिक परिवहन


अनावश्यक बिजली की खपत रोकना



3. ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण


केवल एक ऊर्जा स्रोत पर निर्भरता कम करनी चाहिए।


4. स्वच्छ तकनीक


ऊर्जा उत्पादन में कम प्रदूषण वाली तकनीकों का उपयोग।


5. विकेंद्रीकृत ऊर्जा


ग्रामीण क्षेत्रों में—


सौर ऊर्जा


बायोगैस


छोटे जलविद्युत संयंत्र



का विकास।



---


7. पाँचों पर्यावरणीय खतरों का तुलनात्मक अध्ययन


खतरा मुख्य कारण प्रमुख प्रभाव प्रमुख समाधान


El-Niño प्रशांत महासागर के समुद्री-वायुमंडलीय तापमान में आवधिक परिवर्तन वर्षा एवं मौसम में परिवर्तन पूर्वानुमान, जल प्रबंधन, जलवायु-सहिष्णु कृषि

Global Warming ग्रीनहाउस गैसों में वृद्धि तापमान वृद्धि, समुद्र स्तर वृद्धि, जलवायु परिवर्तन उत्सर्जन में कमी, नवीकरणीय ऊर्जा

Acid Rain SO₂ एवं NOₓ मृदा, जल, वन एवं भवनों पर प्रभाव उत्सर्जन नियंत्रण, स्वच्छ ऊर्जा

Health Hazards प्रदूषण एवं अस्वास्थ्यकर पर्यावरण रोग एवं स्वास्थ्य समस्याएँ स्वच्छ जल, स्वच्छ वायु, स्वच्छता

Energy Crisis ऊर्जा मांग-आपूर्ति असंतुलन आर्थिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय समस्याएँ ऊर्जा संरक्षण एवं नवीकरणीय ऊर्जा




---


8. पाँचों विषयों को एक Flow Chart से समझें


पर्यावरणीय खतरे

                       │

       ┌───────────────┼────────────────┐

       │ │ │

   प्राकृतिक/ जलवायु मानवजनित

   महासागरीय परिवर्तन दबाव

       │ │ │

    El-Niño Global Warming Pollution

                                       │

                              ┌────────┼────────┐

                              │ │ │

                           Acid Rain Health Energy

                                      Hazards Crisis



---


9. El-Niño और Global Warming में अंतर


आधार El-Niño Global Warming


प्रकृति आवधिक महासागरीय-वायुमंडलीय घटना दीर्घकालीन तापमान वृद्धि

क्षेत्र मुख्यतः उष्णकटिबंधीय प्रशांत वैश्विक

अवधि सामान्यतः महीनों से लगभग एक वर्ष या अधिक तक प्रभाव दशकों से सदियों की दीर्घकालीन प्रवृत्ति

प्रमुख कारक समुद्र-वायुमंडल का पारस्परिक संबंध मुख्यतः मानवजनित ग्रीनहाउस गैसों की वृद्धि

प्रभाव वर्षा एवं मौसम के पैटर्न में परिवर्तन दीर्घकालीन जलवायु परिवर्तन




---


10. Global Warming और Acid Rain में अंतर


आधार वैश्विक तापन अम्लीय वर्षा


प्रमुख गैसें CO₂, CH₄, N₂O आदि SO₂ एवं NOₓ

मुख्य समस्या तापमान में वृद्धि वर्षा/निक्षेपण की अम्लीयता में वृद्धि

प्रमुख प्रभाव जलवायु परिवर्तन मृदा, जल, वन एवं संरचनाओं पर प्रभाव

प्रमुख समाधान GHG उत्सर्जन में कमी SO₂/NOₓ उत्सर्जन में कमी




---


11. परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु ⭐


El-Niño


प्रशांत महासागर से संबंधित घटना।

पूर्वी एवं मध्य उष्णकटिबंधीय प्रशांत का समुद्री सतही जल असामान्य रूप से गर्म होता है।

व्यापारिक पवनों में कमजोरी हो सकती है।

वैश्विक मौसम एवं भारतीय मानसून को प्रभावित कर सकता है।


Global Warming


पृथ्वी के औसत तापमान में दीर्घकालीन वृद्धि।


ग्रीनहाउस गैसों की बढ़ती सांद्रता प्रमुख कारण।


समुद्र स्तर, हिमनद, कृषि एवं जैव विविधता प्रभावित हो सकते हैं।



Acid Rain


मुख्यतः SO₂ एवं NOₓ से संबंधित।


मृदा एवं जल के अम्लीकरण का कारण बन सकती है।


वन एवं ऐतिहासिक संरचनाओं को नुकसान पहुँचा सकती है।



Health Hazards


वायु, जल, मृदा एवं ध्वनि प्रदूषण प्रमुख पर्यावरणीय स्वास्थ्य खतरे हैं।


स्वच्छ पर्यावरण मानव स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।



Energy Crisis


ऊर्जा मांग और आपूर्ति के असंतुलन से संबंधित।


जीवाश्म ईंधनों पर अत्यधिक निर्भरता एक प्रमुख चुनौती है।


नवीकरणीय ऊर्जा एवं ऊर्जा संरक्षण महत्वपूर्ण समाधान हैं।




---


12. परीक्षा में संभावित दीर्घ उत्तरीय प्रश्न


1. El-Niño क्या है? इसके कारणों एवं भारतीय मानसून पर प्रभाव की व्याख्या कीजिए।



2. वैश्विक तापन के कारणों, प्रभावों एवं नियंत्रण के उपायों की विवेचना कीजिए।



3. अम्लीय वर्षा क्या है? इसके निर्माण, प्रभाव एवं रोकथाम के उपाय समझाइए।



4. पर्यावरणीय प्रदूषण से उत्पन्न स्वास्थ्य खतरों का वर्णन कीजिए।



5. ऊर्जा संकट के कारण, प्रभाव एवं समाधान की विस्तृत विवेचना कीजिए।



6. पर्यावरणीय खतरों के रूप में El-Niño, Global Warming एवं Acid Rain की व्याख्या कीजिए।



7. ऊर्जा संकट एवं पर्यावरणीय समस्याओं के पारस्परिक संबंध की विवेचना कीजिए।





---


13. लघु उत्तरीय प्रश्न


El-Niño से क्या तात्पर्य है?


El-Niño का भारतीय मानसून पर क्या प्रभाव पड़ता है?


वैश्विक तापन क्या है?


ग्रीनहाउस प्रभाव क्या है?


प्रमुख ग्रीनहाउस गैसों के नाम लिखिए।


अम्लीय वर्षा क्या है?


अम्लीय वर्षा के लिए उत्तरदायी प्रमुख गैसें कौन-सी हैं?


पर्यावरणीय स्वास्थ्य खतरा क्या है?


ऊर्जा संकट से क्या तात्पर्य है?


ऊर्जा संरक्षण क्यों आवश्यक है?


नवीकरणीय ऊर्जा के प्रमुख स्रोत लिखिए।




---


14. उत्तर लेखन के लिए आदर्श संरचना


यदि प्रश्न हो—


“पर्यावरणीय खतरों का वर्णन कीजिए।”


तो उत्तर इस क्रम में लिखें:


भूमिका

↓

पर्यावरणीय खतरे की परिभाषा

↓

1. El-Niño


अर्थ


कारण/प्रक्रिया


प्रभाव


भारत पर प्रभाव



↓


2. Global Warming


अर्थ


कारण


प्रभाव


नियंत्रण



↓


3. Acid Rain


अर्थ


निर्माण


प्रभाव


समाधान



↓


4. Health Hazards


प्रकार


स्वास्थ्य प्रभाव


रोकथाम



↓


5. Energy Crisis


अर्थ


कारण


प्रभाव


समाधान



↓


निष्कर्ष



---


15. निष्कर्ष


पर्यावरणीय खतरे आज मानव समाज के सामने उपस्थित महत्वपूर्ण भौगोलिक एवं पर्यावरणीय चुनौतियाँ हैं। El-Niño जैसे महासागरीय-वायुमंडलीय परिवर्तन मौसम एवं मानसून को प्रभावित कर सकते हैं, जबकि वैश्विक तापन दीर्घकालीन जलवायु परिवर्तन को बढ़ाता है। अम्लीय वर्षा मृदा, जल, वन एवं मानव निर्मित संरचनाओं को प्रभावित करती है। प्रदूषित पर्यावरण से उत्पन्न स्वास्थ्य खतरे मानव जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं और बढ़ती ऊर्जा मांग तथा जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता ऊर्जा संकट एवं पर्यावरणीय समस्याओं को बढ़ा सकती है।


अतः इन समस्याओं का समाधान सतत विकास, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, वनीकरण, पर्यावरण शिक्षा तथा वैज्ञानिक संसाधन प्रबंधन के माध्यम से किया जाना आवश्यक है।


⭐ परीक्षा के लिए अंतिम सूत्र


> El-Niño → महासागर एवं मानसून

Global Warming → तापमान एवं जलवायु परिवर्तन

Acid Rain → SO₂ + NOₓ → अम्लीय निक्षेपण

Health Hazards → प्रदूषण → स्वास्थ्य प्रभाव

Energy Crisis → माँग > आपूर्ति → ऊर्जा असुरक्षा

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