VI EG 1 Meaning & Nature Eco Geo
Economic Geography (आर्थिक भूगोल)
1. Meaning of Economic Geography
आर्थिक भूगोल भूगोल की वह शाखा है जिसमें मनुष्य की आर्थिक क्रियाओं (Economic Activities) तथा उनके स्थानिक वितरण (Spatial Distribution) का अध्ययन किया जाता है।
इसमें यह समझने का प्रयास किया जाता है कि—
आर्थिक गतिविधियाँ कहाँ होती हैं?
क्यों होती हैं?
उनका प्राकृतिक एवं मानवीय कारकों से क्या संबंध है?
सरल शब्दों में
आर्थिक भूगोल पृथ्वी की सतह पर संसाधनों, उत्पादन, वितरण और उपभोग के स्थानिक स्वरूप का अध्ययन है।
प्रमुख परिभाषाएँ (Definitions)
E. W. Zimmermann
Economic geography deals with the area differences in the location of economic activities.
R. S. Thoman
Economic geography is concerned with the spatial organization of economic activities.
हिंदी में
आर्थिक भूगोल वह विज्ञान है जो मानव की आर्थिक गतिविधियों एवं उनके भौगोलिक वितरण का अध्ययन करता है।
2. Nature of Economic Geography
(आर्थिक भूगोल की प्रकृति)
आर्थिक भूगोल की प्रकृति को निम्न बिंदुओं से समझा जा सकता है—
1. सामाजिक विज्ञान की शाखा
आर्थिक भूगोल मानव भूगोल की एक शाखा है, क्योंकि इसमें मनुष्य की आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है।
2. स्थानिक (Spatial) विज्ञान
इसका मुख्य उद्देश्य यह जानना है कि आर्थिक गतिविधियाँ किस स्थान पर केंद्रित हैं और उनके बीच क्षेत्रीय असमानताएँ क्यों हैं।
3. प्राकृतिक एवं मानवीय कारकों पर आधारित
आर्थिक गतिविधियाँ निम्न कारकों से प्रभावित होती हैं—
प्राकृतिक संसाधन
जलवायु
भूमि
जनसंख्या
तकनीक
परिवहन
पूँजी
4. गतिशील प्रकृति (Dynamic Nature)
आर्थिक भूगोल स्थिर नहीं है।
तकनीकी विकास, औद्योगीकरण, वैश्वीकरण आदि के कारण आर्थिक गतिविधियों का स्वरूप बदलता रहता है।
5. विश्लेषणात्मक एवं व्यावहारिक विज्ञान
यह केवल वर्णनात्मक नहीं बल्कि—
समस्याओं का विश्लेषण करता है
क्षेत्रीय विकास योजना में सहायक होता है
6. अंतर्विषयी प्रकृति (Inter-disciplinary)
आर्थिक भूगोल का संबंध—
अर्थशास्त्र
समाजशास्त्र
पर्यावरण विज्ञान
राजनीति विज्ञान
से भी है।
3. Economic Geography के अध्ययन का क्षेत्र (संक्षेप में)
कृषि भूगोल
औद्योगिक भूगोल
परिवहन भूगोल
व्यापार एवं वाणिज्य
संसाधन भूगोल
क्षेत्रीय आर्थिक विकास
4. निष्कर्ष (Conclusion)
आर्थिक भूगोल मानव और पर्यावरण के बीच आर्थिक संबंधों को समझने में सहायता करता है तथा क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने के लिए योजनाएँ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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