VI EG 1 Economic Resources
Topic: Economic Resources
आर्थिक संसाधन उनका वर्गीकरण एवं संरक्षण
आर्थिक संसाधन (Economic Resources)
अर्थ (Meaning)
आर्थिक संसाधन वे सभी प्राकृतिक, मानवीय एवं मानव-निर्मित साधन हैं जिनका उपयोग मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति तथा आर्थिक विकास के लिए करता है और जिनका आर्थिक मूल्य होता है।
सरल शब्दों में – जो संसाधन उत्पादन, वितरण और उपभोग की प्रक्रिया में सहायक हों, उन्हें आर्थिक संसाधन कहते हैं।
परिभाषाएँ (Definitions)
अल्फ्रेड मार्शल के अनुसार –
“वे सभी वस्तुएँ और सेवाएँ जिनका आर्थिक मूल्य हो तथा जिनसे मानवीय आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके, आर्थिक संसाधन कहलाती हैं।”
जिमरमैन के अनुसार –
“संसाधन वह नहीं है जो प्रकृति ने दिया है, बल्कि वह है जिसका उपयोग मनुष्य करता है।”
डिकिन्सन के अनुसार –
“आर्थिक संसाधन वे साधन हैं जो उत्पादन की प्रक्रिया में सहायक होते हैं।”
आर्थिक संसाधनों का वर्गीकरण (Classification of Economic Resources)
आर्थिक संसाधनों को विभिन्न आधारों पर वर्गीकृत किया जा सकता है—
1. उत्पत्ति के आधार पर
(क) प्राकृतिक संसाधन
जो संसाधन प्रकृति से प्राप्त होते हैं।
उदाहरण – भूमि, जल, वन, खनिज, जलवायु, समुद्री संसाधन आदि।
(ख) मानव संसाधन
मनुष्य की शारीरिक, मानसिक क्षमता, ज्ञान और कौशल।
उदाहरण – श्रमिक, इंजीनियर, शिक्षक, डॉक्टर।
(ग) मानव-निर्मित संसाधन
मनुष्य द्वारा निर्मित साधन।
उदाहरण – मशीनें, सड़कें, बाँध, भवन, उद्योग।
2. नवीकरण की क्षमता के आधार पर
(क) नवीकरणीय संसाधन
जो पुनः उत्पन्न हो सकते हैं।
उदाहरण – जल, वन, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा।
(ख) अनवीकरणीय संसाधन
जो एक बार समाप्त होने पर पुनः प्राप्त नहीं होते।
उदाहरण – कोयला, पेट्रोलियम, लौह अयस्क।
3. उपयोग के आधार पर
(क) वास्तविक संसाधन
जो वर्तमान में उपयोग में लाए जा रहे हैं।
उदाहरण – चालू खदानें, सिंचित भूमि।
(ख) संभावित संसाधन
जो भविष्य में उपयोग किए जा सकते हैं।
उदाहरण – थार मरुस्थल में सौर ऊर्जा की संभावनाएँ।
4. वितरण के आधार पर
(क) सर्वव्यापी संसाधन
जो हर स्थान पर उपलब्ध होते हैं।
उदाहरण – वायु, सूर्य का प्रकाश।
(ख) स्थानीय संसाधन
जो कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
उदाहरण – खनिज, पेट्रोलियम।
5. स्वामित्व के आधार पर
व्यक्तिगत संसाधन
सामुदायिक संसाधन
राष्ट्रीय संसाधन
अंतरराष्ट्रीय संसाधन
आर्थिक संसाधनों का संरक्षण (Conservation of Economic Resources)
संरक्षण का अर्थ
संसाधनों का वैज्ञानिक, विवेकपूर्ण एवं दीर्घकालिक उपयोग ही संरक्षण कहलाता है ताकि वर्तमान के साथ-साथ भविष्य की आवश्यकताएँ भी पूरी हो सकें।
संसाधन संरक्षण की आवश्यकता
संसाधनों की सीमित उपलब्धता
जनसंख्या में तीव्र वृद्धि
औद्योगीकरण एवं शहरीकरण
पर्यावरण प्रदूषण
भावी पीढ़ियों की आवश्यकताएँ
आर्थिक संसाधनों के संरक्षण के उपाय
1. प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण
वनों की कटाई पर नियंत्रण
जल संरक्षण एवं वर्षा जल संचयन
खनिजों का नियंत्रित दोहन
वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का विकास
2. मानव संसाधन संरक्षण
शिक्षा और कौशल विकास
स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार
रोजगार के अवसरों का सृजन
3. मानव-निर्मित संसाधनों का संरक्षण
मशीनों का उचित रख-रखाव
पुनर्चक्रण (Recycling)
आधुनिक तकनीक का उपयोग
सतत विकास और संसाधन संरक्षण
सतत विकास का अर्थ है –
“वर्तमान की आवश्यकताओं की पूर्ति इस प्रकार करना कि भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं से समझौता न हो।”
निष्कर्ष (Conclusion)
आर्थिक संसाधन किसी भी देश की आर्थिक प्रगति की रीढ़ होते हैं। इनका वैज्ञानिक वर्गीकरण एवं संरक्षण न केवल वर्तमान विकास के लिए आवश्यक है बल्कि भविष्य की सुरक्षा के लिए भी अनिवार्य है। इसलिए संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
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